पालमपुर के शास्त्रीय संगीत गुरु शरण दास का देहांत, क्षेत्र में शौक की लहर 

रविवार सुबह 92 वर्षीय वयोवृद्ध शरण दास निवासी रामचौक घुग्गर, पालमपुर का हृदय गति रुक जाने से देहांत हो गया जिस कारण क्षेत्र में शौक की लहर छा गई। उनका अंतिम संस्कार घुग्गर में नाला मंदिर के समीप बने मोक्षधाम में रविवार को कर दिया गया जहां सभी लोगों ने उनको नम आंखों से विदाई दी।

Sep 3, 2023 - 23:11
Sep 3, 2023 - 23:16
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पालमपुर के शास्त्रीय संगीत गुरु शरण दास का देहांत, क्षेत्र में शौक की लहर 

सुमन महाशा। पालमपुर

रविवार सुबह 92 वर्षीय वयोवृद्ध शरण दास निवासी रामचौक घुग्गर, पालमपुर का हृदय गति रुक जाने से देहांत हो गया जिस कारण क्षेत्र में शौक की लहर छा गई। उनका अंतिम संस्कार घुग्गर में नाला मंदिर के समीप बने मोक्षधाम में रविवार को कर दिया गया जहां सभी लोगों ने उनको नम आंखों से विदाई दी।
शरण दास ने भारतीय रेलवे में 1954 से लेकर 1989 तक 35 साल अपनी सेवाएं दीं और उसके बाद मारंडा रेलवे स्टेशन से सेवानिवृत्त हुए। 
शरण दास भारत पाकिस्तान विभाजन से पहले  लगभग 14 साल की उम्र में लाहौर चले गए थे और उन्होंने वहां एक साल तक नौकरी की लेकिन इस दौरान विभाजन की चिंगारी सुलगने लगी थी जिस कारण वह वापिस पालमपुर आ गए। 
शरण दास की बचपन से ही 
शास्त्रीय संगीत के प्रति रुचि थी। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता स्वर्गीय मोहरू राम और अपने दादा स्वर्गीय बीबर राम से सीखी, जो उस समय जानेमाने शहनाई वादक हुआ करते थे। उसके बाद  उन्होंने संगीत गुरु पंडित दीना नाथ से भवारना में संगीत की बारीकियां सीखीं।
वह हिमाचल शास्त्रीय संगीत अकादमी के सदस्य भी थे। उनके द्वारा सिखाए गए कई शिष्य आज अच्छे मुकाम पर हैं। उनके अंतिम संस्कार में पालमपुर के कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

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