बिलासपुर में क्यों उतरा हमीरपुर के अमित का ‘हवाई सपना’?
हमीरपुर के अमित कुमार ने बिलासपुर में ‘हवाई अड्डा टर्मिनल 34’ का सपना क्यों चुना? दियोटसिद्ध-शाहतलाई क्षेत्र में अनोखे एयरोप्लेन रेस्टोरेंट की तैयारी।
सुमन महाशा। कांगड़ा
बिलासपुर नेशनल हाईवे पर प्रस्तावित ‘हवाई अड्डा टर्मिनल 34’ इन दिनों चर्चा में है। एयरोप्लेन रेस्टोरेंट और उससे जुड़े अनोखे अनुभव को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है, लेकिन इस प्रोजेक्ट की कहानी सिर्फ एक विमान के इर्द-गिर्द नहीं है।
सवाल यह भी है कि हमीरपुर से जुड़े अमित कुमार ने अपने इस सपने के लिए बिलासपुर को ही क्यों चुना? इसके पीछे उनके हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के अनुभव, अपने प्रदेश में कुछ अलग करने की इच्छा और एक ऐसे डेस्टिनेशन की कल्पना दिखाई देती है, जहां सफर के बीच लोग ठहरने की वजह तलाशें।
देशभर में अनुभव के बाद अपनी मिट्टी में सपना
अमित कुमार का संबंध जिला हमीरपुर से है। हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में एयरोप्लेन रेस्टोरेंट से जुड़े प्रोजेक्ट्स का अनुभव हासिल किया।
दूसरों के लिए इस तरह के प्रोजेक्ट्स से जुड़ने के बाद उनके मन में अपना प्रोजेक्ट अपनी ही मिट्टी में स्थापित करने का विचार आया। इसी सोच के साथ हिमाचल में उपयुक्त जगह की तलाश शुरू हुई और बिलासपुर इस योजना का केंद्र बना।
आखिर बिलासपुर को ही क्यों चुना?
दियोटसिद्ध की धार्मिक पहचान से लेकर शाहतलाई तक का क्षेत्र हिमाचल में अपनी अलग पहचान रखता है। इसके साथ ही नेशनल हाईवे इस क्षेत्र को आवागमन के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाता है।
इसी भौगोलिक और यातायात कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए यहां ऐसा डेस्टिनेशन विकसित करने की कल्पना की गई, जहां राहगीर केवल गुजरें नहीं, बल्कि कुछ समय रुककर अनुभव भी ले सकें।
यही सोच आगे चलकर ‘हवाई अड्डा टर्मिनल 34’ के रूप में सामने आई।
सिर्फ एयरोप्लेन नहीं, पूरा अनुभव बनाने की तैयारी
‘हवाई अड्डा टर्मिनल 34’ में एयरोप्लेन निश्चित रूप से सबसे बड़ा आकर्षण है, लेकिन प्रस्तावित अवधारणा इससे आगे की है।
इस प्रोजेक्ट के पीछे ऐसी जगह तैयार करने की सोच है, जहां एक ही परिसर में लोगों को अलग-अलग अनुभव मिल सकें। इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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एयरोप्लेन रेस्टोरेंट का अनुभव
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भोजन और हॉस्पिटैलिटी
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हिमाचली संस्कृति से जुड़ाव
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मनोरंजन
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परिवार के साथ समय बिताने की सुविधा
इस तरह इसे केवल खाने की जगह के बजाय एक डेस्टिनेशन एक्सपीरियंस के तौर पर विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
हमीरपुर से निकला सपना, बिलासपुर में मिली जमीन
अमित कुमार के लिए यह केवल व्यवसाय के लिए जगह चुनने का फैसला नहीं है। उनके लिए यह उस यात्रा का अगला पड़ाव है, जिसमें हिमाचल से बाहर काम करते हुए अनुभव हासिल किया गया और फिर उस अनुभव को अपने प्रदेश में वापस लाने का प्रयास किया गया।
जन्मभूमि हमीरपुर रही, लेकिन इस सपने को जमीन बिलासपुर ने दी।
यही इस प्रोजेक्ट की कहानी को स्थानीय स्तर पर और दिलचस्प बनाता है।
राजनीतिक संदर्भ से अलग है प्रोजेक्ट की कहानी
हमीरपुर की सार्वजनिक पहचान में पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल, सांसद अनुराग ठाकुर और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जैसे प्रमुख राजनीतिक नाम जुड़े रहे हैं। वहीं बिलासपुर की पहचान में जे.पी. नड्डा का नाम प्रमुखता से आता है।
हालांकि, ‘हवाई अड्डा टर्मिनल 34’ की कहानी का केंद्र राजनीतिक संदर्भ नहीं, बल्कि अमित कुमार का उद्यम और अपने प्रदेश में एक अलग तरह का अनुभव विकसित करने की उनकी सोच है।
मार्च 2027 में शुरू करने की तैयारी
प्रोजेक्ट को मार्च 2027 में शुरू करने की तैयारी बताई गई है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह अनोखी अवधारणा धरातल पर किस रूप में सामने आती है और बिलासपुर से गुजरने वाले लोगों के लिए किस तरह का नया अनुभव लेकर आती है।
दियोटसिद्ध से शाहतलाई तक एक नया पड़ाव?
दियोटसिद्ध से शाहतलाई और हमीरपुर से बिलासपुर तक की इस कहानी में एयरोप्लेन केवल एक आकर्षण या प्रतीक भर है।
असल कहानी उस सोच की है, जिसमें बाहर जाकर अनुभव हासिल करने के बाद उसे अपनी मिट्टी में वापस लाने का प्रयास किया गया है।
निष्कर्ष
‘हवाई अड्डा टर्मिनल 34’ के जरिए बिलासपुर में एक अलग तरह का हॉस्पिटैलिटी और डेस्टिनेशन अनुभव विकसित करने की तैयारी है। अब मार्च 2027 की प्रस्तावित शुरुआत के बाद ही साफ होगा कि अमित कुमार का यह ‘हवाई सपना’ बिलासपुर की धरती पर लोगों को कितना नया अनुभव दे पाता है।
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