शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शिक्षा विभाग को मिली उपनिदेशकों की जांच रिपोर्ट ने कई वरिष्ठ माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालयों की हकीकत उजागर कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, पर्याप्त फंड उपलब्ध होने के बावजूद अनेक स्कूलों में शौचालय गंदे हैं, कक्षाओं में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क नहीं हैं और साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है।
इस गंभीर लापरवाही पर शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग आशीष कोहली ने सभी जिलों के उपनिदेशकों और स्कूल प्रधानाचार्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्कूलों में उपलब्ध फंड का सही और पारदर्शी उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और बुनियादी सुविधाएं स्कूल की प्राथमिक आवश्यकता हैं और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इससे पहले सचिव शिक्षा विभाग राकेश कंवर ने भी स्कूलों को अमलगमेटेड फंड के उपयोग को लेकर निर्देश जारी किए थे। उन्होंने स्पष्ट किया था कि इस फंड का 85 प्रतिशत तक उपयोग आवश्यक जरूरतों और आधारभूत सुविधाओं पर किया जा सकता है। बावजूद इसके, निरीक्षण में खराब शौचालय, फर्नीचर की कमी और अव्यवस्थित कक्षाएं सामने आईं।
शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि अब फंड की कमी बहाना नहीं चलेगा। दोषी पाए जाने वाले स्कूलों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि छात्रों को बेहतर और सुरक्षित अध्ययन वातावरण मिल सके।