नाहन। सरकार द्वारा दूध के समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोतरी ने सिरमौर जिला के पशुपालकों के लिए नई उम्मीदें जगाई हैं। खासकर उपमंडल सराहां सहित ग्रामीण क्षेत्रों में इस निर्णय का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। सरकार के इस कदम से न केवल दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिला है, बल्कि पशुपालकों की आर्थिक स्थिति भी पहले से अधिक मजबूत हुई है।
प्रदेश सरकार ने गाय के दूध का समर्थन मूल्य 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का समर्थन मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया है। इससे दुग्ध उत्पादकों को उनके परिश्रम का उचित मूल्य मिल रहा है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा का अहसास हुआ है। जिला सिरमौर में मिल्कफेड द्वारा संचालित दुग्ध केंद्रों के अंतर्गत 37 दुग्ध सहकारी समितियां कार्य कर रही हैं, जिनसे जुड़े 1562 दुग्ध उत्पादक नियमित रूप से अपना दूध दुग्ध केंद्रों में उपलब्ध करवा रहे हैं। दूध के समर्थन मूल्य में वृद्धि का सीधा लाभ इन सभी पशुपालकों को मिल रहा है।
पशोग गांव के दुग्ध उत्पादक श्याम दत्त गौतम बताते हैं कि उनके पास तीन जर्सी गायें हैं और वे प्रतिदिन लगभग 12 लीटर दूध दुग्ध सहकारी सभा को देते हैं। उनके अनुसार बीते कुछ वर्षों में दूध के दामों में 20 से 25 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है। इससे पशुपालकों में दोबारा उत्साह बढ़ा है।
वहीं, धिनी पंचायत बनाह की सेर दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति से जुड़े भूपेंद्र ठाकुर का कहना है कि सरकार का यह निर्णय आम किसान और पशुपालकों के हित में है। दुग्ध क्रय मूल्य बढ़ने से गांवों में पशुपालन को नई दिशा मिली है और किसान अब इस व्यवसाय को लाभकारी मानकर आगे बढ़ रहे हैं।