बंजार में उमड़ा आस्था का सैलाब, देव रथ प्रतिष्ठा में पहुंचे जयराम ठाकुर
बंजार में माँ वल्ले दुर्गा व महर्षि मार्कण्डेय के नवनिर्मित रथों की प्राण-प्रतिष्ठा में पूर्व CM जयराम ठाकुर ने लिया भाग, उमड़ा आस्था का सैलाब।
बंजार (कुल्लू)
देवभूमि हिमाचल की आस्था, संस्कृति और परंपराओं का भव्य स्वरूप शनिवार को बंजार के बलागाड़ क्षेत्र में देखने को मिला। माँ वल्ले दुर्गा और महर्षि मार्कण्डेय जी के नवनिर्मित रथों की पावन प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने लिया देवी-देवताओं का आशीर्वाद
इस दिव्य आयोजन में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने देवी-देवताओं के दर्शन कर—
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क्षेत्र व प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की
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आपदाओं से रक्षा हेतु प्रार्थना की
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देव संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया
कार्यक्रम में पहुंचने पर स्थानीय विधायक सुरेंद्र शौरी ने उनका स्वागत किया और देव समाज की ओर से आभार व्यक्त किया।
देव रथों का मिलन बना श्रद्धा का केंद्र
इस अवसर पर—
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माँ वल्ले दुर्गा
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महर्षि मार्कण्डेय (बलागाड़)
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ऋषि मार्कण्डेय (पेड़चा)
के रथों का पावन मिलन हुआ, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। पूरे क्षेत्र में “अठारह करडू की जय-जयकार” से वातावरण पूरी तरह देवमय हो गया।
देव संस्कृति हमारी पहचान: जयराम ठाकुर
जनसभा को संबोधित करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा—
“देव परंपराएँ, देव आस्थाएँ और देव अवस्थाएँ ही हमारी विशिष्ट पहचान हैं। हम पहाड़ी लोग सदियों से देव संस्कृति से जुड़े रहे हैं और यही हमारी सामाजिक एकता की ताकत है।”
उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में रहें, अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहना सबसे आवश्यक है।
सनातन संस्कृति पर हो रहे प्रहारों पर चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि—
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महानगरों में सनातन संस्कृति पर योजनाबद्ध हमले हो रहे हैं
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ऐसे समय में समाज की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है
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हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा स्वयं करनी होगी
उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद भव्य आयोजन के लिए मेला समिति की सराहना की।
अयोध्या राम मंदिर का किया उल्लेख
जयराम ठाकुर ने कहा कि—
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पांच वर्षों के संघर्ष और
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में
भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण संभव हुआ। यह मंदिर हमारी राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।
निष्कर्ष
बंजार का यह देव आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हिमाचल की जीवंत देव संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। श्रद्धा, विश्वास और परंपरा का यह संगम आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश देता है।
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