सिर्फ दो जिलों में नोटिफाई हुई वोटर लिस्ट, पंचायत चुनाव पर फिर संकट
हिमाचल में पंचायत चुनावों पर संकट, 12 में से केवल 2 जिलों की वोटर लिस्ट नोटिफाई, बाकी 10 जिलों से आयोग को इंतजार।
शिमला । हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर स्थिति एक बार फिर उलझती नजर आ रही है। हिमाचल हाई कोर्ट के फैसले और उसके बाद राज्य सरकार तथा राज्य चुनाव आयोग के बीच हुई बैठकों के बावजूद जमीनी स्तर पर चुनावी प्रक्रिया तय रफ्तार से आगे नहीं बढ़ पा रही है। ताजा स्थिति यह है कि राज्य के कुल 12 जिलों में से अब तक केवल दो जिलों लाहुल-स्पीति और शिमला में ही वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देकर नोटिफाई किया जा सका है, जबकि शेष 10 जिलों से राज्य चुनाव आयोग को अभी भी फैसले का इंतजार है।
राज्य चुनाव आयोग का कहना है कि पंचायत चुनावों के लिए वोटर लिस्ट को नोटिफाई करने की प्रक्रिया में जिला प्रशासन का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। नियमों के अनुसार सभी जिलों में जिलाधीश और संबंधित एसडीएम को फॉर्म-15 पर हस्ताक्षर कर वोटर लिस्ट को अधिसूचित करना होता है, लेकिन अधिकांश जिलों में यह औपचारिकता अब तक पूरी नहीं की गई है। इसी कारण चुनावी प्रक्रिया अटक गई है।
उधर, शहरी निकायों—नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत के लिए ओबीसी जनगणना का मामला भी अभी प्रारंभिक चरण में है। इस प्रक्रिया के शुरू न हो पाने से शहरी निकाय चुनावों पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। इन नई परिस्थितियों को देखते हुए राज्य चुनाव आयोग ने अब हिमाचल हाई कोर्ट में एक ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्णय लिया है, ताकि मौजूदा हालात से अदालत को अवगत कराया जा सके।
हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दी है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार अदालत द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर चुनाव कराने के पक्ष में है। हाई कोर्ट ने 28 फरवरी तक आरक्षण रोस्टर को अंतिम रूप देने और 30 अप्रैल से पहले पूरी चुनावी प्रक्रिया संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। राज्य चुनाव आयोग को इन्हीं डेडलाइन के अनुसार सभी औपचारिकताएं पूरी करनी हैं।
इस बीच राज्य सरकार ने शहरी निकायों में प्रशासकों की नियुक्ति कर दी है, जबकि पंचायत स्तर पर दैनिक और सामान्य कार्यों के संचालन के लिए समितियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बावजूद इसके, यदि जिलों में वोटर लिस्ट नोटिफाई करने की प्रक्रिया में तेजी नहीं आई, तो पंचायत चुनावों पर एक बार फिर संकट गहराना तय माना जा रहा है।
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