नेता विपक्ष जयराम ठाकुर बोले- झूठी गारंटियां पूरी करना केंद्र सरकार का काम नहीं
नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र को दोष देने की बजाय प्रदेश की खराब वित्तीय स्थिति और अधूरी गारंटियों पर ध्यान दें।
शिमला। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को अपनी नाकामियों का ठीकरा केंद्र पर फोड़ने की कोशिश करने की जगह राज्य की वित्तीय स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। चुनावी समय में दी गई झूठी गारंटियों को पूरा करना केंद्र का दायित्व नहीं है। केंद्र प्रायोजित 191 योजनाओं में 10 फीसदी हिस्सेदारी देने से भी कांग्रेस सरकार भाग रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को आधार बनाकर पूरे देश के लिए समान नीतियां बनाती है।
सोमवार को जारी बयान में नेता विपक्ष ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक युगांतकारी परिवर्तन की घोषणा की है। ऐतिहासिक मनरेगा योजना के स्थान पर अब एक नया व्यापक कानून विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण लागू किया जा रहा है। सरकार ने इस बदलाव के तहत बजट में भारी फेरबदल करते हुए नई योजना के लिए 95,692.31 करोड़ रुपये का विशाल आवंटन किया है, जबकि मनरेगा के लंबित कार्यों को पूर्ण करने के लिए 30,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट दिया है। जो मुख्य रूप से पुरानी देनदारियों और ट्रांजिशन अवधि के लिए आरक्षित है। दोनों योजनाओं का बजट लगभग सवा लाख करोड़ से अधिक है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट बताती हैं कि प्रदेश के लगभग 1.72 लाख कार्य लंबित हैं और 655 पंचायतों में लोगों को एक दिन का भी काम लोगों को नहीं मिल पाया हैं। राज्य के हिस्से की दिहाड़ी अगस्त से मनरेगा कामगारों को नहीं मिली हैं। यह नई योजना केवल मजदूरी देने का माध्यम नहीं बल्कि एक मिशन है, जिसमें ग्रामीण परिवारों को अब 100 के बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। मजदूरों के हित में भुगतान की अवधि को 15 दिनों से घटाकर साप्ताहिक (7 दिन) कर दिया गया है। केंद्र अब सामान्य राज्यों से 40 प्रतिशत और हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों से मात्र 10 प्रतिशत हिस्सेदारी ही लेगा लेकिन यहां इस देनदारी से पहले ही सुक्खू सरकार के पसीने छूटने शुरू हो गए हैं।
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