फर्जी ई-चालान मैसेज से ठगी, नया साइबर स्कैम ऐसे करता है काम
हिमाचल में फर्जी ई-चालान मैसेज से साइबर ठगी बढ़ी। पुलिस ने 29 करोड़ रुपए रिकवर किए। जानें नया स्कैम कैसे काम करता है और बचाव के उपाय।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब शातिर ठग फर्जी ई-चालान के मैसेज भेजकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने इस नए स्कैम को लेकर राज्यभर में अलर्ट जारी किया है।
29 करोड़ रुपए रिकवर, फिर भी खतरा बरकरार
हिमाचल पुलिस के अनुसार वर्ष 2025 में साइबर ठगी के कई मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब 29 करोड़ रुपये की राशि रिकवर की गई है। इसके बावजूद नए-नए तरीकों से ठग आम लोगों को निशाना बना रहे हैं।
कैसे आता है फर्जी ई-चालान मैसेज?
1. साइबर क्राइम विंग के मुताबिक ठग
2.व्हाट्सऐप और SMS के जरिए
3.ओवरस्पीड, रफ ड्राइविंग या ट्रिपल राइडिंग का हवाला देकर
4.फेक ई-चालान नोटिस भेजते हैं
ये मैसेज बिल्कुल सरकारी भाषा और फॉर्मेट में होते हैं, जिससे लोग आसानी से भरोसा कर लेते हैं।
APK फाइल और लिंक सबसे बड़ा खतरा
मैसेज में दिए गए लिंक या APK फाइल पर क्लिक करते ही मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल हो जाता है।
इसके बाद ठगों को मिल जाती है एक्सेस:
बैंक और UPI डिटेल्स
OTP और पासवर्ड
फोटो और कॉन्टैक्ट लिस्ट
यहां तक कि WhatsApp अकाउंट भी हैक हो सकता है
सरकारी अधिकारी बनकर धमकी
कई मामलों में पीड़ितों को
खुद को RTO या पुलिस अधिकारी बताने वाले
धमकी भरे कॉल आते हैं
“तुरंत जुर्माना नहीं भरा तो कार्रवाई” की चेतावनी दी जाती है
डर के माहौल में लोग पेमेंट कर देते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं।
नया ई-चालान स्कैम कैसे करता है काम?
भारत में ट्रैफिक चालान से जुड़े मैसेज आम होने का फायदा उठाकर ठग यह तरीका अपनाते हैं:
फर्जी लिंक पर क्लिक
सरकारी वेबसाइट जैसी दिखने वाली फेक साइट
“Pay Traffic Fine” लिखा होता है
कार्ड/UPI डिटेल्स भरते ही पैसा साफ
2026 की शुरुआत में बढ़े मामले
पुलिस के अनुसार 2026 की शुरुआत में ही फेक ई-चालान स्कैम में तेज उछाल देखा गया है।
इसी को देखते हुए दिसंबर 2025 में ही राज्यव्यापी एडवाइजरी जारी की गई थी।
कैसे करें बचाव? (जानना जरूरी)
हिमाचल पुलिस की अपील:
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें
APK फाइल डाउनलोड बिल्कुल न करें
ई-चालान केवल parivahan.gov.in या आधिकारिक ऐप पर ही चेक करें
संदिग्ध मैसेज की शिकायत 1930 या cybercrime.gov.in पर करें
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