पच्छाद बस रूट विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, सरकार-HRTC को नोटिस

सिरमौर के पच्छाद क्षेत्र के सराहां–नाडब–खोजर बस रूट विवाद पर हाईकोर्ट ने सरकार और HRTC को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

Feb 5, 2026 - 18:41
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पच्छाद बस रूट विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, सरकार-HRTC को नोटिस

नाहन। जिला सिरमौर के पच्छाद क्षेत्र में वर्षों से संचालित सराहां–मेहंदोबाग–नाडब–खोजर बस रूट को लेकर उपजा विवाद अब प्रदेश हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एचआरटीसी) को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को तय की है।

यह याचिका रत्तन लाल व अन्य की ओर से दायर की गई है, जिसमें जनप्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं में ग्राम पंचायत काठड़ के उप-प्रधान रतन लाल, बीडीसी सदस्य भावना शर्मा और गांव चमरोगी के निवासी राजेंद्र सिंह ठाकुर शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि यह बस रूट पिछले 20 से 22 वर्षों से एचआरटीसी द्वारा नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है और आज भी पूरी तरह सफल एवं चालू स्थिति में है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को अवगत करवाया कि सराहां से नाडब–खोजर तक फैला यह रूट कथाड़, सुरला जनोट, जामन की सैर, काटली, सराहां और नैना टिक्कर सहित छह से अधिक ग्राम पंचायतों को जोड़ता है। इस रूट से प्रतिदिन करीब 10 से 12 हजार की आबादी को सीधा लाभ मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क के निर्माण में स्थानीय लोगों ने न केवल अपनी जमीन दान की, बल्कि निजी स्तर पर आर्थिक सहयोग भी दिया, जिसके बाद सरकार से धन स्वीकृत करवाकर सड़क को विकसित किया गया।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि एचआरटीसी की बस वर्षों से तय समयसारिणी के अनुसार चल रही है। बस शाम 4 बजकर 20 मिनट पर सराहां से रवाना होकर रात 7 बजकर 30 मिनट पर नाडब–खोजर पहुंचती है। अगले दिन सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर नाडब–खोजर से प्रस्थान कर सुबह 10 बजे सराहां पहुंचती है। ग्रामीणों का तर्क है कि यह समयसारिणी छात्रों, कर्मचारियों और मरीजों की जरूरतों के अनुरूप है।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस कारण के इस रूट या समयसारिणी में बदलाव करना जनहित के विपरीत है। इससे क्षेत्र के हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी और उन्हें वैकल्पिक साधनों के अभाव में भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले पर सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।

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