UPI से लेनदेन में हुआ फर्जीवाड़ा तो होगी भरपाई, जानें कितना मुआवजा देने पर हो रहा है विचार

UPI फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों को राहत देने की तैयारी। RBI ने 25,000 रुपये तक मुआवजे का प्रस्ताव रखा, जल्द आएगा ड्राफ्ट नियम।

Feb 6, 2026 - 15:40
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UPI से लेनदेन में हुआ फर्जीवाड़ा तो होगी भरपाई, जानें कितना मुआवजा देने पर हो रहा है विचार

लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से लेनदेन का चलन लगातार जोर पकड़ रहा है। सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा को बताया था कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक यूपीआई से रिकॉर्ड 230 लाख करोड़ रुपये तक का लेनदेन हुआ है। लेकिन यूपीआई पेमेंट में धोखाधड़ी की घटनाएं भी बहुत ज्यादा हो रही हैं। ऐसे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने यूपीआई फ्रॉड का शिकार होने पर आम लोगों को मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा है। ताजा मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद जारी वक्तव्य में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसकी जानकारी दी।

धोखाधड़ी से हुए लेनदेन में कितना मिलेगा मुआवजा?
आरबीआई ने छोटे मूल्य के धोखाधड़ी वाले यूपीआई ट्रांजैक्शन में होने वाले नुकसान के लिए ग्राहकों को 25,000 रुपये तक का मुआवजा देने के लिए एक ढांचा पेश करने का प्रस्ताव दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्राहक सुरक्षा को सशक्त बनाना और अनधिकृत डिजिटल लेनदेन के प्रति ग्राहकों के जोखिम को कम करना है।

मुआवजे का ढांचा क्या हो, जारी होगा कंस्टलेशन पेपर
अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन में ग्राहकों की लायबिलिटी को सीमित करने के संबंध में मौजूदा निर्देश 2017 में जारी किए गए थे। बैंकिंग सेक्टर और पेमेंट सिस्टम्स में तकनीक के तेजी से अपनाए जाने के कारण इन निर्देशों की समीक्षा की गई है। अब प्रस्तावित मुआवजे के ढांचे सहित संशोधित निर्देशों का एक मसौदा जल्द ही परमार्श के लिए जारी किया जाएगा। आम लोग से लेकर विशेषज्ञ तक अपनी राय देकर बता सकेंगे कि मुआवजा की राशि कैसे तय की जाए।

यूपीआई फ्रॉड रोकने के लिए इन उपायों पर भी विचार
इसके अतिरिक्त, डिजिटल भुगतान की सुरक्षा बढ़ाने के लिए आरबीआई एक डिस्कसन पेपर भी प्रकाशित करेगा। इसमें वरिष्ठ नागरिकों जैसे कुछ विशेष श्रेणियों के यूजर्स के लिए एडिशनल ऑथेंटिकेशन और लैग्ड क्रेडिट्स जैसे सुरक्षा उपायों पर विचार किया जा सकता है। गवर्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्राहक सुरक्षा के लिए तीन मसौदा दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, जो मिस-सेलिंग, लोन वसूली एजेंटों की नियुक्ति और अनधिकृत लेनदेन में ग्राहकों की लायबिलिटी को सीमित करने से संबंधित होंगे। 

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