चिट्टे का खौफनाक सच : मजे से शुरू, बर्बादी तक सफर
हिमाचल में चिट्टे के नशे का खौफनाक सच सामने आया। एक युवक ने बताया कैसे मजे के लिए शुरू हुआ नशा उसे अपराध, कर्ज और बर्बादी तक ले गया।
बिलासपुर। हिमाचल में तेजी से फैल रहे चिट्टे (हेरोइन) के नशे ने युवाओं की जिंदगी को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है। एक 32 वर्षीय युवक की आपबीती इस कड़वे सच को उजागर करती है कि नशा कैसे मजे से शुरू होकर जिंदगी तबाह कर देता है। युवक ने बताया कि उसने 20 साल की उम्र में पहली बार चंडीगढ़ से आए एक दोस्त के कहने पर चिट्टा लिया। शुरुआत में इसे मजे और तनाव दूर करने का साधन समझा, लेकिन यही कदम उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती साबित हुआ।
मुफ्त का लालच बना जाल
दोस्त ने शुरुआत में कई बार मुफ्त में चिट्टा दिया। धीरे-धीरे शरीर इसकी लत का आदी हो गया। इसके बाद पैसे की मांग शुरू हुई और यहीं से युवक नशे के दलदल में फंसता चला गया।
परिवार से धोखा, फिर कर्ज का बोझ
नशे की लत पूरी करने के लिए युवक ने घरवालों से झूठ बोलना शुरू कर दिया। कभी फीस, कभी बीमारी का बहाना बनाकर पैसे ऐंठे। जब घर से पैसे मिलने बंद हुए तो रिश्तेदारों से उधार लेना शुरू किया।
रूह कंपा देने वाला सच
युवक ने खुलासा किया कि लगातार इंजेक्शन लेने से जब नसें खराब हो जाती हैं, तो नशेड़ी शरीर के संवेदनशील अंगों में इंजेक्शन लगाने लगते हैं। इतना ही नहीं, नशा न मिलने पर लोग नशीली गोलियों को उबालकर सीधे नसों में डालते हैं, जिससे मौत का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
नशेड़ी से तस्कर बनने तक का सफर
उधारी बढ़ने पर युवक का संपर्क बाहरी राज्यों के तस्करों से हुआ। उन्होंने उसे उधार में चिट्टा देना शुरू किया और बदले में तस्करी के लिए मजबूर किया। इस दौरान वह तीन बार पुलिस के हत्थे चढ़ा और जेल भी गया।
किशोर और लड़कियां भी निशाने पर
युवक के मुताबिक अब नशा माफिया स्कूल-कॉलेजों के आसपास सक्रिय है। 16 से 18 साल के किशोरों और कम उम्र की लड़कियों को पहले मुफ्त में नशा दिया जाता है, फिर उन्हें सप्लायर बना लिया जाता है।
“मैं तो बर्बाद हो गया…”
आज 32 साल की उम्र में युवक दिहाड़ी-मजदूरी कर रहा है। शरीर बीमारियों से जूझ रहा है और मानसिक तनाव लगातार बना रहता है। उसने भावुक होकर कहा, “मैं तो बर्बाद हो गया, लेकिन चाहता हूं कि देवभूमि का कोई और बेटा इस नर्क में न गिरे।”
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