सीएम की घोषणाएं हवा में? बंदल–सर्ची आपदा पीड़ित दर-दर भटके
कुल्लू के बंदल और सर्ची गांव के आपदा पीड़ितों को आज तक न राहत राशि मिली न पुनर्वास भूमि, डीसी कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों का दर्द छलका।
कुल्लू। प्रदेश सरकार की बड़ी-बड़ी घोषणाओं के बावजूद बंदल और सर्ची गांव के आपदा प्रभावित परिवार आज भी मूलभूत सहायता से वंचित हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा स्वयं गांव के द्वार कार्यक्रम के तहत क्षेत्र का दौरा करने और रात वहीं बिताने के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि पीड़ित परिवार आज भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
आपदा में बंदल गांव लगभग पूरी तरह बह गया था। गांव के 25 से अधिक परिवारों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और वे बेघर हो गए। इसके बाद सरकार द्वारा मंडी रैली में प्रभावित परिवारों को 8-8 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई थी। घोषणा के अनुसार पहली किस्त के रूप में 4 लाख रुपये उसी दिन खातों में डाले जाने थे, लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद आज तक यह राशि प्रभावितों को नहीं मिल पाई है।
सरकारी मदद न मिलने के कारण पीड़ित परिवार अपने नए आशियाने का निर्माण तक शुरू नहीं कर सके हैं। न तो मकान बनाने के लिए ज़मीन उपलब्ध करवाई गई और न ही किसी तरह की अंतरिम सहायता दी गई। मजबूरी में कई परिवार नीली तिरपाल (छतरी) के नीचे जीवन गुजार रहे हैं, जबकि कुछ लोग रिश्तेदारों या अन्य ग्रामीणों के घर शरण लेने को विवश हैं।
समस्या सिर्फ बंदल गांव तक सीमित नहीं है। सर्ची गांव की करीब 18 किलोमीटर लंबी सड़क आपदा के बाद से अब तक बहाल नहीं हो पाई है। सड़क बंद होने से आम जनता, स्कूली बच्चों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए चुनौती बना हुआ है।
सरकार और प्रशासन की उदासीनता से आहत बंदल और सर्ची गांव के लोग आज अपनी व्यथा सुनाने के लिए उपायुक्त कुल्लू के द्वार पहुंचे। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द राहत राशि जारी करने, पुनर्वास के लिए भूमि उपलब्ध करवाने और सर्ची सड़क को शीघ्र बहाल करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाला समय उनके लिए और भी भयावह हो सकता है।
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