गाहर घाटी के बिलिंग में गोची उत्सव का भव्य शुभारंभ

लाहौल-स्पीति की गाहर घाटी के बिलिंग गांव में देवता अठारह नाग की पूजा के साथ पारंपरिक गोची उत्सव का शुभारंभ।

Feb 9, 2026 - 18:09
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गाहर घाटी के बिलिंग में गोची उत्सव का भव्य शुभारंभ

केलांग। लाहौल–स्पीति जिले की प्रसिद्ध गाहर घाटी के बिलिंग गांव में पुत्र प्राप्ति के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले पारंपरिक एवं सांस्कृतिक महत्व से जुड़े गोची उत्सव का आज विधिवत और भव्य शुभारंभ हो गया। उत्सव को लेकर पूरे गांव में विशेष उत्साह और उल्लास का माहौल बना हुआ है। गोची उत्सव लाहौल की सदियों पुरानी लोक परंपरा और सामूहिक सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है गोची उत्सव की शुरुआत गांव के आराध्य देवता अठारह नाग की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई। पूजा के उपरांत पारंपरिक ग्रेक्स गाए गए और रीति-रिवाजों के अनुसार पूरे गांव में उत्सव का आयोजन किया गया।

चार परिवारों में पुत्र रत्न की प्राप्ति

इस वर्ष बिलिंग गांव में चार परिवारों में पुत्र रत्न की प्राप्ति होने पर सामूहिक रूप से गोची उत्सव मनाया जा रहा है। लारजे जायलत्से नोरबू, स्वाची के जिगमेद उरज्ञान, पांस के जितसेन नमसेल तथा गुमलिंगपा के जिगमेद तोबदन के जन्म पर पूरे गांव ने मिलकर खुशियां साझा कीं।

सामूहिक भागीदारी की अनूठी परंपरा

गोची उत्सव केवल संबंधित परिवारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसमें पूरा गांव भागीदारी निभाता है। इस अवसर पर ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा धारण कर एक-दूसरे के घर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं, बधाइयां देते हैं और सामाजिक एकता व भाईचारे का संदेश देते हैं।

लोक रीति-रिवाज और पारंपरिक खान-पान

परंपरा के अनुसार देवता की पूजा के पश्चात गांववासी और नजदीकी रिश्तेदार एकत्र होकर सामूहिक जश्न मनाते हैं। पारंपरिक खान-पान, लोक रीति-रिवाज और आपसी मेल-मिलाप इस उत्सव के प्रमुख आकर्षण रहते हैं।

भविष्यवाणी की सदियों पुरानी परंपरा

गोची उत्सव की एक विशेष परंपरा के तहत कल लबदागपा द्वारा तीर मारकर अगले वर्ष पुत्र प्राप्ति से संबंधित भविष्यवाणी की जाएगी। ग्रामीणों का मानना है कि इस परंपरा से आने वाले वर्ष के शुभ संकेत प्राप्त होते हैं।

संस्कृति और नई पीढ़ी से जुड़ाव

स्थानीय लोगों के अनुसार गोची उत्सव पूरी घाटी को जोड़ने वाला सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन है। इससे नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, संस्कृति और सामूहिक जीवन मूल्यों से जोड़ने का अवसर मिलता है। आज भी गाहर घाटी में गोची उत्सव को पूर्वजों की परंपरा के अनुसार पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है।

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