दुविधा में भाजपा, राजस्व घाटा अनुदान पर रुख स्पष्ट नहीं कर पाएः मुख्यमंत्री
हिमाचल में राजस्व घाटा अनुदान को लेकर सियासत तेज, CM सुक्खू ने भाजपा पर साधा निशाना, सर्वदलीय बैठक छोड़ने पर उठाए सवाल।
शिमला । मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों में राजस्व घाटा अनुदान को बंद करने के प्रदेश पर संभावित प्रभाव पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान को वापस लेने का प्रस्ताव राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इससे राज्य की आर्थिकी पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने बैठक को बीच में छोड़कर जाने के लिए भाजपा की आलोचना की और इस कदम को बेहद निंदनीय बताया।
उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्देे को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और राज्य के लोगों के हितों की रक्षा करने के बजाय सिर्फ राजनीति कर रही है। नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि न केवल कांग्रेस, बल्कि सीपीआई (एम), आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने भी राजस्व घाटा अनुदान को फिर से बहाल करने के लिए प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश के अधिकारों के लिए खड़ी होने को तैयार नहीं है। भाजपा नेता जनता के दबाव में बैठक में शामिल हुए और फिर बीच में ही छोड़कर चले गए।
सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को अपने कार्यकाल के दौरान राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर 54,000 करोड़ रुपये और जीएसटी मुआवजे के तौर पर 16,000 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि मौजूदा राज्य सरकार को अब तक राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर सिर्फ 17,000 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने कहा कि पूरी सावधानी और वित्तीय प्रबंधन के साथ प्रदेश सरकार राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 275 (1) के अंतर्गत राजस्व घाटा अनुदान राज्यों का एक सांविधानिक अधिकार है, जिसका उद्देश्य राजस्व और व्यय के बीच के अंतर को कम करना है। यह व्यवस्था 1952 से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने अधिकारों के लिए लड़ना अच्छी तरह से जानती है लेकिन भाजपा का रुख प्रदेश हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेशवासियों के हितों की रक्षा का मामला है।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेता दुविधा में हैं और राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे पर लोगों के सामने अपना रुख साफ तौर पर रखने में नाकाम रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा नेताओं को एहसास है कि केन्द्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान वापस लेना सही कदम नहीं है, लेकिन उनमें रुख स्पष्ट करने की हिम्मत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कभी भी राज्य के लोगों के साथ खड़ी नहीं रही। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने भी सर्वदलीय बैठक बीच में ही छोड़कर जाने के लिए भाजपा की आलोचना की।
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