अब हर मौसम में उगेगी गुच्छी, किसानों को मिला बीज
हिमाचल में गुच्छी की खेती पर बड़ा शोध, खुंब निदेशालय सोलन ने पालमपुर, सिरमौर व चौपाल के किसानों को बीज उपलब्ध कराया।
सोलन। जंगलों में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली बहुमूल्य और दुर्लभ गुच्छी (मोरल मशरूम) अब खेती के जरिए उगाई जा सकेगी। हिमाचल प्रदेश में पहली बार गुच्छी को अलग-अलग तापमान वाले क्षेत्रों में उगाने को लेकर बड़ा शोध शुरू किया गया है।
तीन तरह के तापमान में होगा शोध
खुंब निदेशालय सोलन (डीएमआर) ने गुच्छी की खेती को लेकर एक नई पहल की है। इसके तहत: अत्यधिक ठंडे क्षेत्र, मध्यम तापमान वाले क्षेत्र, उच्च तापमान वाले क्षेत्र इन तीनों जलवायु परिस्थितियों में गुच्छी की वृद्धि और उत्पादन पर एक साथ शोध किया जाएगा।
इन क्षेत्रों के किसानों को मिला बीज
शोध परियोजना के तहत निदेशालय ने चुनिंदा किसानों को गुच्छी का बीज उपलब्ध कराया है। इसमें शामिल हैं:
पालमपुर
सिरमौर
चौपाल
इन क्षेत्रों का चयन तापमान में विविधता को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
गुच्छी मशरूम बाजार में बेहद महंगी बिकती है और इसकी मांग देश-विदेश में रहती है। अब अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो यह हिमाचल के किसानों के लिए आय का एक नया और मजबूत स्रोत बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियंत्रित परिस्थितियों में गुच्छी की खेती संभव होने से इसकी उपलब्धता बढ़ेगी और अवैध जंगल संग्रह पर भी रोक लगेगी।
पर्यावरण संरक्षण को भी मिलेगा लाभ
अब तक गुच्छी जंगलों से तोड़ी जाती रही है, जिससे वन्य पारिस्थितिकी पर असर पड़ता है। खेती के जरिए उत्पादन होने से: जंगलों पर दबाव कम होगा, जैव विविधता सुरक्षित रहेगी, किसानों को वैकल्पिक आजीविका मिलेगी।
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