पीटरहॉफ बैठक में सियासी संग्राम, BJP का वॉकआउट
पीटरहॉफ में आरडीजी पर सर्वदलीय बैठक में सियासी टकराव, सीएम सुक्खू ने भाजपा पर साधा निशाना, आपत्तिजनक टिप्पणी पर भाजपा का वॉकआउट।
शिमला। हिमाचल सरकार ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने पर आज सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसमें आरडीजी के कारण उपजे वित्तीय हालात को लेकर चर्चा की गई, क्योंकि 16वें वित्त आयोग ने आरडीजी बंद करने की केंद्र सरकार से सिफारिश कर दी है। केंद्र ने भी इन सिफारिशों को मान लिया है। वहीं, बैठक संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भाजपा पर खूब बरसे। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का सहयोग नहीं कर रही है और जनता भी इन्हें नकार देगी। इसके साथ ही संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा भाजपा के लोग सिर्फ लड़ने की मंशा से आए थे।
आरडीजी को लेकर भाजपा दुविधा में, अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही: सीएम
वहीं मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में आरडीजी के मामले पर विपक्ष ने बोलने से मना कर दिया। बैठक में हमने जानना चाह था कि क्या आरडीजी को लेकर भाजपा सरकार के साथ है कि नहीं? लेकिन भाजपा दुविधा में फंसी है। भाजपा आरडीजी पर अपना स्टैंड क्लियर नहीं कर रही। अगर इस पर अपनी स्थिति स्प्ष्ट नहीं करनी थी तो सर्वदलीय बैठक में आने की क्या आवश्यकता थी।
BJP का वॉकआउट
16 वें वित्तायोग की सिफारिश पर केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल का राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने के मामले में सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का भाजपा ने वाकआउट किया। केंद्र सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने के विरोध में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और भाजपा पार्टी प्रदेशाध्यक्ष राजीव बिंदल सहित अन्य भाजपा नेता बैठक छोड़कर बाहर निकल गए।
भाजपा ने सरकार पर साधा निशाना
बैठक के दौरान भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने आपत्ति दर्ज कराई कि कुछ वक्ताओं द्वारा केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के संदर्भ में अनुचित और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। डॉ. बिंदल ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होना कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि पूर्व वित्त आयोगों 14वें और 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित था कि यह अनुदान चरणबद्ध रूप से कम होगा और निर्धारित अवधि के बाद समाप्त होगा। ऐसे में इसे नई आपदा के रूप में प्रस्तुत कर जनता को भ्रमित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब यह तथ्य वर्षों से ज्ञात था, तो प्रदेश सरकार को समय रहते वैकल्पिक संसाधन सृजन, व्यय नियंत्रण और राजस्व वृद्धि की नीति पर काम करना चाहिए था।
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