वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़े में सोलन–बिलासपुर के बीच मिले अहम सुराग
आरएलए सोलन वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़े में बिलासपुर से तार जुड़ते दिखे हैं। आरोपी क्लर्क पहले बिलासपुर में तैनात था, पुलिस जांच तेज।
सोलन । पंजीकरण और लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आरएलए) सोलन में वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़े में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। सोलन में भी बिलासपुर की तरह फर्जीवाड़े के कुछ अहम सुराग मिले हैं। पुलिस ने इस पर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच में बिलासपुर व सोलन दोनों आरएलए में हुए फर्जीवाड़े में भी आपसी लिंक पाया जा रहा है। हालांकि सोलन में कितने पुराने वाहनों को पंजीकृत किया गया है। इस पर अभी पुलिस जांच कर रही है।
जांच के दौरान सामने आया है कि जिस क्लर्क ने वाहन पोर्टल पर अपनी और एसडीएम की फर्जी आईडी तैयार की थी। वह इससे पहले बिलासपुर आरएलए में ही तैनात था। नवंबर में ही उसे सोलन आरएलए में ट्रांसफर किया गया था। ऐसे में पुलिस को अंदेशा है कि बिलासपुर में निलंबित क्लर्क व सोलन फर्जीवाड़े के क्लर्क में आपसी तालमेल हो सकते हैं। पुलिस ने अब दोनों की कॉल रिकॉर्ड निकलवाना शुरू कर दिया है। कॉल रिकॉर्ड से भी यह साफ हो जाएगा कि दोनों में लिंक था या नहीं।
वहीं बाहरी राज्यों में यह नेटवर्क कहां तक फैला था, पुलिस ने इस पर एंगल से भी तफ्तीश शुरू कर दी है। इसमें जल्द बड़े खुलासे हो सकते हैं। वहीं सोलन में फर्जीवाड़े में संलिप्त क्लर्क पर भी कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। उपायुक्त के पास एसडीएम ने कार्रवाई के लिए फाइल सौंप दी गई है। अब उपायुक्त को पुलिस की जांच इंतजार है। पुलिस जांच में अगर क्लर्क दोषी पाया जाता है तो उसे निलंबित कर दिया जाएगा।
उपायुक्त सोलन का बयान
उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने कहा, “आरएलए में हुए फर्जीवाड़े की पुलिस जांच जारी है। आरोपी क्लर्क कुछ समय पहले ही बिलासपुर से सोलन ट्रांसफर हुआ है। बिलासपुर में निलंबित क्लर्क और सोलन के आरोपी के बीच लिंक की जांच की जा रही है। यदि दोष सिद्ध होता है तो नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
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