ज्वाली की 14 पंचायतें प्यास से बेहाल ; 42 करोड़ की बोह–द्रोणी जल योजना ठप, विभाग बोला – “फिलहाल सर्वाइवल मुश्किल”
ज्वाली के कोटला क्षेत्र में 42 करोड़ की बोह-द्रोणी जल योजना फेल, 14 पंचायतें पानी के लिए तरसीं। पाइपलाइन टूटी, टैंक बहा, लोग परेशान।
संजीव भारद्वाज, ज्वाली
विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच ज्वाली के कोटला क्षेत्र की करीब 14 पंचायतें आज बूंद-बूंद पानी को तरस रही हैं। लगभग 42 करोड़ रुपये की लागत से बनी बोह–द्रोणी ग्रेविटी जल योजना ज़मीनी हकीकत में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। वर्ष 2021-22 में तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई यह महत्वाकांक्षी योजना अब कागज़ों तक सिमट कर रह गई है ।
ग्राउंड ज़ीरो की सच्चाई: पाइप बिछी, पर पानी नहीं
“रोज़ाना हिमाचल” की टीम ने मौके पर जाकर हालात का जायज़ा लिया तो तस्वीर बेहद चिंताजनक दिखी- जल स्रोत अभी भी जल विद्युत परियोजना से जुड़ा हुआ है, वैकल्पिक स्रोत का दावा, लेकिन पाइप सिर्फ रखी गई हैं न जोड़ी गईं, न चालू। नदी किनारे बना टैंक पहली ही बरसात में बह गया, अब क्षतिग्रस्त हालत में पड़ा है। नदी पार करते ही पाइप लाइन कई जगह से टूटी हुई; पाइप इधर-उधर बिखरी। विभाग की पुष्टि 2-3 अन्य स्थानों पर भी पाइप लाइन क्षतिग्रस्त। योजना का ढांचा खड़ा है, लेकिन पानी का प्रवाह शून्य है।
जनता का फूटा गुस्सा: “राजनीति नहीं, पानी चाहिए”
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों की राशि खर्च होने के बावजूद उन्हें पानी की एक बूंद भी नहीं मिल रही। पूर्व उप-प्रधान ग्राम पंचायत बही पठियार सुदर्शन सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा “कभी कहा जाता है मोटर जल गई, कभी कहा जाता है टैंक में पानी नहीं है। करोड़ों खर्च होने के बाद भी जनता प्यास से जूझ रही है। विभाग बहानेबाज़ी बंद करे और पक्ष-विपक्ष मिलकर हल निकाले।”
युवा संगठन ने उठाए भ्रष्टाचार के सवाल
नवशक्ति युवा क्लब बही पठियार के प्रधान *दिलबाग सिंह* ने मौके पर निरीक्षण कर गंभीर सवाल उठाए “42 करोड़ आखिर खर्च कहाँ हुए? मरम्मत के लिए जो पैसा आया, उसका हिसाब कौन देगा? पाइप लाइन और रूट का काम बेहद लापरवाही से किया गया। पत्थरों के ऊपर जल्दबाज़ी में बना वाटर टैंक पहली बरसात में बह गया यह सीधी-सीधी लापरवाही है।”
अभी इसका सर्वाइवल असंभव
जल शक्ति विभाग मंडल ज्वाली के अधिशासी अभियंता ने स्वीकार किया की लगभग 40 करोड़ की योजना, 13 किलोमीटर लंबी ग्रेविटी पाइप लाइन बोह से कोटला तक बिछाई गई। शुरुआती टेस्टिंग में कुछ समय पानी दिया गया। पहली ही बरसात में योजना क्षतिग्रस्त। डेढ़ साल पहले मरम्मत हुई, लेकिन अगली बरसात में फिर ठप। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य जल जीवन मिशन (JJM)* का भुगतान न मिलने से अधूरा। क्षेत्र में भारी भूस्खलन, मौजूदा रूट तकनीकी रूप से असुरक्षित। उन्होंने साफ कहा “फिलहाल इस योजना को पूरी तरह लागू करना मुश्किल है। अतिरिक्त बजट मिला तो प्रयास होंगे, लेकिन अभी इसका सर्वाइवल असंभव लगता है।”
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