गैर-जिम्मेदार बयान से उजागर हुई सुधीर शर्मा की सोच: जग्गी
धर्मशाला में पूर्व महापौर देवेन्द्र जग्गी ने कांग्रेस नेता सुधीर शर्मा के बयान को गैर-जिम्मेदार बताते हुए भाषा की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल उठाए।
सुमन महाशा। कांगड़ा
धर्मशाला के पूर्व महापौर देवेन्द्र जग्गी ने कांग्रेस नेता सुधीर शर्मा के एक बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि “बम बनाने वालों को पैसा व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए” जैसी टिप्पणी न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि इससे एक जनप्रतिनिधि की संकीर्ण और अपरिपक्व सोच भी उजागर होती है।
सामाजिक सौहार्द पर पड़ता है नकारात्मक असर
देवेन्द्र जग्गी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों से समाज को जोड़ने, शांति और सौहार्द का संदेश देने की अपेक्षा की जाती है। इसके विपरीत, इस तरह के बयान सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाते हैं और जनता के बीच गलत संदेश देते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंक, हिंसा और बम जैसे शब्दों का राजनीतिक बयानबाज़ी में प्रयोग अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजनीतिक मर्यादा और भाषा पर सवाल
पूर्व महापौर ने कहा कि नेताओं को अपनी भाषा और सोच में संयम रखना चाहिए। सनसनी फैलाने वाले बयानों से सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास न केवल राजनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का भी अपमान है।
परिपक्वता की अपेक्षा
देवेन्द्र जग्गी ने कहा कि सुधीर शर्मा से जनता को अधिक परिपक्वता और जिम्मेदारी की उम्मीद थी, लेकिन यह बयान निराशाजनक है। उन्होंने आग्रह किया कि राजनीति में भाषा की गरिमा बनाए रखते हुए प्रदेश के हित में सकारात्मक और जिम्मेदार राजनीति की जाए।
निष्कर्ष
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश शांति, भाईचारे और संस्कारों की भूमि है। यहां इस प्रकार की सोच और बयानबाज़ी का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। जनप्रतिनिधियों को शब्दों की जिम्मेदारी समझते हुए समाज को जोड़ने वाला संदेश देना चाहिए।
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