आरडीजी पर घिरी सरकार, कटवाल का तीखा वार
झंडूता विधायक जीतराम कटवाल ने आरडीजी मुद्दे पर प्रदेश सरकार को घेरा। कहा- यह सिर्फ हिमाचल नहीं, सभी राज्यों के लिए बंद हुई व्यवस्था।
बिलासपुर । झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को लेकर प्रदेश सरकार को सवालों के कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि वित्तायोग का गठन नियम 280 के तहत होता है, जबकि आरडीजी से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा 275(1) का हवाला देकर शुरू की गई है। यह सरासर गलत है। आरडीजी केवल हिमाचल नहीं, बल्कि सभी राज्यों की बंद की गई है। इसे अपना हक बताने वाली प्रदेश सरकार को यह बात समझनी चाहिए कि नियम भी सभी के लिए होते हैं। जनरल कैटेगरी स्टेट्स की तुलना में हिमाचल को कहीं अधिक मदद मिल रही है। ऐसे में बात-बात पर आरडीजी का राग अलापना सही नहीं है।
विधानसभा में नियम 102 के तहत आरडीजी से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए जीतराम कटवाल ने कहा कि केंद्र सरकार अपना काम बखूबी कर रही है। आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, मुफ्त रसोई गैस, मुफ्त राशन, वन रैंक-वन पेंशन, आवास, शौचालय व किसान सम्मान जैसी कई कल्याणकारी योजनाएं सुचारू तरीके से चलाकर विकसित भारत के माॅडल को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। जनरल कैटेगरी स्टेट्स की तुलना में केंद्रीय प्रायोजित कई बड़ी योजनाओं में हिमाचल की हिस्सेदारी केेवल 90ः10 या 80ः20 तय की गई है। टैक्स शेयर 32 से बढ़ाकर 41 फीसदी किया गया है। जीएसटी कलेक्शन में भी वृद्धि हुई है। पहले यह 3-4 हजार करोड़ रुपये थी, जबकि अब लगभग 14 हजार करोड़ रुपये आएगी। अपनी नाकामियों पर पर्दा डालकर जिम्मेदारियों से पल्लू झाड़ने के बजाए प्रदेेश सरकार को केंद्र से सीख लेनी चाहिए।
जीतराम कटवाल ने कहा कि हिमाचल पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके लिए प्रदेश सरकार ही जिम्मेदार है। खर्च और लोन घटाने के लिए केंद्र से कई बार आगाह करने के बावजूद प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आलम यह है कि विकास कार्यों के लिए पैसा ही नहीं बचा है। ट्रेजरी पिछले साल से बंद पड़ी हैं। सत्ता पक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि विकास में कोई कमी नहीं रखी जा रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि ज्यादातर काम बंद पड़े हैं। झंडूता विधानसभा क्षेत्र में बन रहे 9 में से 4 पुलों के केवल अप्रोच रोड बनने बाकी हैं, लेकिन 2022 के बाद से स्थिति जस की तस है। आरडीजी कोई अनिवार्यता नहीं, बल्कि एक व्यवस्था थी। यह अचानक बंद नहीं हुई है। 12वें वित्तायोग ने इसकी सिफारिश की थी। राजस्व बढ़ाने के दर्जनों अन्य रास्ते हैं। प्रदेश सरकार को अपनी कार्यप्रणाली पर मंथन करना होगा।
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