हिमाचल आर्थिक संकट में? BJP नेता परमार का सरकार पर हमला

विपिन परमार ने हिमाचल सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया। कहा- प्रदेश आर्थिक संकट और अराजकता की कगार पर पहुंच चुका है।

Feb 19, 2026 - 20:07
Feb 19, 2026 - 20:10
 0  18
हिमाचल आर्थिक संकट में? BJP नेता परमार का सरकार पर हमला

संजीव भारद्वाज।धर्मशाला

भाजपा उपाध्यक्ष एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने प्रदेश सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश आज प्रशासनिक अव्यवस्था, वित्तीय कुप्रबंधन और राजकोषीय असंतुलन का शिकार बन चुका है। विपिन सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के शासनकाल में प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था चरमरा गई है और हिमाचल आर्थिक अराजकता की स्थिति में पहुंच गया है। “यह सामान्य संकट नहीं है, यह शासन की विफल नीतियों का परिणाम है,” उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि वित्त आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को “केंद्र सरकार की कठपुतली” कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और असंवैधानिक सोच को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग कोई राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त दायित्व निभाने वाली संस्था है। “शब्दों का चयन संयमित होना चाहिए। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करना लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है,” उन्होंने कहा।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि लगभग 10,000 करोड़ रुपये के लंबित यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (UC) को लेकर केंद्र सरकार द्वारा गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। “यह कोई साधारण प्रशासनिक त्रुटि नहीं है। यदि विभागों के माध्यम से गलत उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजे गए हैं तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता है। जब जांच होगी तो जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी,” उन्होंने चेतावनी दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र पोषित योजनाओं के लिए प्राप्त धन को योजनाओं में व्यय करने के बजाय कर्मचारियों के वेतन और पेंशन भुगतान में लगा दिया गया। बिलासपुर रेलवे परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 500 करोड़ रुपये रेलवे कार्यों के लिए आए थे, किंतु प्रदेश सरकार ने उस धन को अन्य मदों में समाहित कर लिया।

विपिन सिंह परमार ने कहा कि FRBM अधिनियम के प्रावधान स्पष्ट हैं  राजकोषीय घाटा तीन प्रतिशत की सीमा में रहना चाहिए और राजस्व घाटा शून्य करने की दिशा में निरंतर प्रयास होने चाहिए। “परंतु सरकार ने इन चेतावनियों को कभी गंभीरता से नहीं लिया। न अधिकारियों ने ध्यान दिया और न ही मुख्यमंत्री ने इसे प्राथमिकता दी,” उन्होंने आरोप लगाया।

उन्होंने सदन में आंकड़े रखते हुए कहा कि 2022-23 में RDG मिलने के बावजूद राजस्व घाटा 6336 करोड़ रुपये रहा और 2023-24 में 8058 करोड़ रुपये RDG मिलने के बाद भी राजस्व घाटा 5569 करोड़ रुपये पर रहा। विपिन सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में 510 करोड़ रुपये, कृषि क्षेत्र में 216 करोड़ रुपये तथा परिवार कल्याण विभाग के 150 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए गए। 2990 से अधिक यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट लंबित पड़े हैं। “सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन धरातल पर धन का समुचित उपयोग तक नहीं कर पा रही,” उन्होंने कटाक्ष किया।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार के समय प्रारंभ की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को सत्ता में आते ही बंद कर दिया गया, जिससे प्रदेश का हर वर्ग प्रभावित हुआ। 

विपिन सिंह परमार ने कहा कि RDG पर चर्चा का उद्देश्य केंद्र को कटघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति सुधारने की ठोस रणनीति प्रस्तुत करना होना चाहिए था। “राजस्व घाटा शून्य करने की दिशा में स्पष्ट रोडमैप, व्यर्थ व्यय पर अंकुश और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन ही समाधान है,” उन्होंने सुझाव दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, “प्रदेश को इस वित्तीय संकट में आपकी नीतियों ने धकेला है। जनता अब कथनी और करनी का अंतर समझ चुकी है। हिमाचल की जनता समय आने पर इसका लोकतांत्रिक जवाब अवश्य देगी।” इस प्रकार विधायक विपिन सिंह परमार ने सदन में सरकार की वित्तीय नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0