भाजपा ने फिजूलखर्ची से लुटाया राज्य का खजाना: सुक्खू
मुख्यमंत्री सुक्खू का भाजपा पर हमला, कहा– पूर्व सरकार ने 54,296 करोड़ आरडीजी का दुरुपयोग किया, कांग्रेस को तीन साल में सिर्फ 17,563 करोड़ मिले।
शिमला । मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने राज्य के खजाने को विकास कार्यों और आवश्यक अधोसंरचना पर खर्च करने के बजाय फिजूलखर्ची और राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को पांच वर्ष के कार्यकाल में 54,296 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) मिला था। यह राशि राज्य की कुल आय का 25 से 30 प्रतिशत थी। इसके अलावा पूर्व भाजपा सरकार को 16,000 करोड़ रुपये की जीएसटी क्षतिपूर्ति भी मिली थी जिसका उपयोग राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारने के बजाय मुफ्त योजनाओं और केंद्रीय नेतृत्व को खुश करने के लिए अनावश्यक कार्यक्रमों और संस्थानों को खोलने पर खर्च किया गया।
उन्होंने कहा कि इसके मुकाबले वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,563 करोड़ रुपये आरडीजी मिली है, जो भाजपा को मिली राशि से लगभग आधी है। उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग के तहत भाजपा सरकार को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के रूप में वर्ष 2018-19 में 8,449 करोड़ रुपये, 2019-20 में 8,271 करोड़ रुपये और 2020-21 में 8,062 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा अंतरिम अनुदान के रूप में 11,431 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। 15वें वित्त आयोग के तहत 2021-22 में 7834 करोड़ रुपये और 2022-23 में 10,249 करोड़ रुपये मिले। इस प्रकार भाजपा सरकार को कुल 54,296 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके बावजूद भाजपा सरकार ने कर्मचारियों के बकाया भुगतान नहीं किए और न ही महंगाई भत्ता (डीए) जारी किया। जबकि वर्तमान कांग्रेस सरकार को 15वें वित्त आयोग के तहत 2023-24 में 8,058 करोड़ रुपये, 2024-25 में 6,258 करोड़ रुपये और 2025-26 में 3,257 करोड़ रुपये मिले। इस तरह कांग्रेस सरकार को कुल 17,563 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए, जो भाजपा सरकार को मिले अनुदान की तुलना में लगभग आधे से भी कम हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वर्तमान सरकार ने दिसंबर, 2022 में कार्यभार संभाला, तब राज्य भारी आर्थिक संकट में था। भाजपा शासन के अंत तक राज्य पर कुल कर्ज बढ़कर लगभग 76,185 करोड़ रुपये हो गया था, जिसमें पांच वर्षों में लगभग 28,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि स्थिति और बिगड़ गई क्योंकि भाजपा सरकार ने बिना बजट प्रावधान के 10,000 करोड़ रुपये के वेतन संशोधन और डीए बकाया की घोषणा कर दी। इसके अलावा भाजपा ने अपने अंतिम छह महीनों में 900 से अधिक संस्थान खोल दिए, जिससे हर साल लगभग 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। आर्थिक संकट से बचने के लिए वर्तमान सरकार को इनमें से कई संस्थानों को बंद करना पड़ा।
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