तोरनू छिंज मेले में संदीप बने बड़ी माली, युवा पहलवानों ने जीता दिल

तोरनू गांव के पारंपरिक छिंज मेले में सताला के संदीप ने बड़ी माली जीती। अंडर-15 पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन कर ग्रामीण खेल संस्कृति को नई पहचान दी।

Jul 6, 2026 - 18:27
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तोरनू छिंज मेले में संदीप बने बड़ी माली, युवा पहलवानों ने जीता दिल

तोरनू। रोजाना हिमाचल

तोरनू गांव में आयोजित पारंपरिक छिंज मेला इस वर्ष खेल प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना। मेले का मुख्य उद्देश्य अंडर-15 वर्ग के युवा पहलवानों को मंच प्रदान करना था, जहां क्षेत्रभर से पहुंचे खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन कर दर्शकों का दिल जीत लिया।

सताला के संदीप ने जीती बड़ी माली

प्रतियोगिता का सबसे रोमांचक मुकाबला बड़ी माली का रहा, जिसमें सताला के प्रतिभाशाली पहलवान संदीप ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। उनके दांव-पेंच और आत्मविश्वास ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

युवा पहलवानों ने दिखाई बेहतरीन प्रतिभा

छिंज मेले में तोरनू, सताला, जनुई, कामन, जोगिंदर सहित आसपास के क्षेत्रों के युवा पहलवानों ने भाग लिया। मुकाबलों के दौरान खिलाड़ियों ने अनुशासन, खेल भावना और तकनीकी कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता की मुख्य विशेषताएं:

  • बड़ी माली के विजेता बने सताला के संदीप।
  • अंडर-15 वर्ग के खिलाड़ियों को विशेष अवसर दिया गया।
  • ग्रामीण क्षेत्रों के उभरते पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन किया।
  • सबसे छोटे पहलवान अमृतांश रैणा विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

ग्रामीण खेल संस्कृति को मिला बढ़ावा

मेले में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। आयोजन के दौरान पंचायत प्रधान राजकुमार सहित कुलदीप राज, कमल किशोर, टेक चंद, कुशल कुमार, सुरेंद्र कुमार, पुरुषोत्तम, रोशन लाल, अनिल कुमार, रविंद्र रैणा, राहुल और डॉ. अरुण रैणा विशेष रूप से मौजूद रहे।

सभी अतिथियों ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का माध्यम हैं, बल्कि हिमाचल की पारंपरिक कुश्ती संस्कृति को भी जीवंत बनाए रखते हैं।

विजेताओं का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के अंत में विजेता और सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन लगातार किए जाएंगे, ताकि युवाओं को खेलों से जोड़कर उन्हें बेहतर अवसर प्रदान किए जा सकें।

निष्कर्ष

तोरनू का पारंपरिक छिंज मेला केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्रामीण खेल संस्कृति, भाईचारे और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने का सशक्त मंच बनकर सामने आया। खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित किया कि गांवों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।

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