हिमाचल में शुरू शिवरात्रि उत्सव, घर-घर आएंगे महादेव
हिमाचल में शिवरात्रि उत्सव की धूम शुरू। शिमला, मंडी, कुल्लू में खास परंपराएं, जहां महादेव को ‘सईं राजा’ मानकर घर-घर स्वागत होता है।
शिमला । देवभूमि हिमाचल में शिवरात्रि की तैयारियां शुरू हो गई है। लोग महादेव के स्वागत के लिए जोरों शोरों से तैयारी कर रहे हैं क्योंकि महादेव आने वाले है। देश की बात की जाए या प्रदेश की हर जगह शिवरात्रि का त्यौहार अलग अलग तरह से मनाया जाता है। लेकिन हम आपको बताएंगे हिमाचल के उन क्षेत्रों के बारे में जहाँ शिवरात्रि का उत्सव कई दिन पहले ही शुरू हो जाता है। यहाँ पारंपरिक धुनों में भोलेनाथ का स्वागत किया जाता है, यहां भगवान शिव को महादेव या भोलेनाथ नहीं सईं राजा कहकर पुकारा जाता है और बात करेंगे एक ऐसी परम्परा के बारे में जिससे यह तय होता है की आखिर शिवरात्रि वाले दिन महादेव किसके घर में प्रवेश करेंगे।
जब पहाड़ की चोटियों पर जमी बर्फ सूरज की पहली किरण से सुनहरी होने लगती है, तब हिमाचल की वादियों में एक अलग ही गूँज सुनाई देती है। क्यूंकि यहाँ शिवरात्रि केवल एक व्रत या पूजा नहीं, बल्कि पहाड़ों का अटूट विश्वास है। सूरज ढलते ही जब गाँव की किसी एक चौखट पर पूरा कुनबा जुटता है और ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोक-गीत गूँजते हैं, तो ऐसा लगता है मानो साक्षात शिव कैलाश छोड़कर अपने भक्तों के आँगन में उतर आए हों। यहाँ शिवरात्रि महज एक तिथि नहीं, बल्कि सदियों पुरानी विरासत का उत्सव है।
यहाँ की शिवरात्रि मंदिरों की चारदीवारी से निकलकर हर घर के आँगन, हर ढोल की गूँज और हर पहाड़ी गीत की लय में बसती है। यह उस अटूट श्रद्धा की गाथा है, जहाँ रात भर जागकर पूरा गाँव अपने ‘ईष्ट’ को पूजता है और महादेव को अपने परिवार का हिस्सा मानकर उनके साथ खुशियाँ मनाता है। हम बात कर रहे है अप्पर हिमाचल शिमला, मंडी, कुल्लू के उन क्षेत्रों की जहाँ महाशिवरात्रि पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है।
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