सबरीमाला मंदिर : क्या अदालतें तय करेंगी धर्म की सीमा? फैसले पर टिकी देश की नजर
सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ सबरीमाला और धार्मिक अधिकार बनाम समानता पर सुनवाई करेगी। जानें पूरा शेड्यूल और बड़े सवाल।
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और उससे जुड़े धर्म बनाम समानता के विवादों पर सुनवाई की पूरी तैयारी कर ली है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने साफ किया है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 9 जजों की बड़ी संविधान पीठ 7 अप्रैल 2026 से खुली अदालत में दलीलें सुनेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पहले सबरीमाला से जुड़े कानूनी सवालों पर बहस होगी और उसके बाद ही अन्य संबंधित मामलों को लिया जाएगा। सभी पक्षों को अपनी लिखित दलीलें जमा करने के लिए 14 मार्च 2026 तक का समय दिया गया है। इस सुनवाई के जरिए कोर्ट उन पुराने कानूनी विवादों को खत्म करना चाहता है जो साल 2020 में कोविड और अन्य कारणों से अटक गए थे।
धर्म और न्यायिक समीक्षा के बड़े सवालों पर मंथन
इस ऐतिहासिक सुनवाई के दौरान कोर्ट कई बुनियादी संवैधानिक सवालों के जवाब तलाशेगा. इसमें सबसे अहम यह है कि अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मिलने वाली धार्मिक आजादी की सीमा क्या है और क्या अदालत किसी धर्म की ‘आवश्यक प्रथा’ को परिभाषित कर सकती है. इसके अलावा धार्मिक संप्रदायों की परिभाषा और प्रचलित परंपराओं की न्यायिक समीक्षा के अधिकार पर भी फैसला होगा. सबरीमाला के साथ-साथ यह बेंच दाऊदी बोहरा समुदाय, मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश और पारसी महिलाओं की धार्मिक स्थिति जैसे मुद्दों पर भी विचार करेगी. पारसी पंचायत के वकील ने भी धर्म से बाहर शादी करने वाली महिलाओं की स्थिति का सवाल उठाया है जिसे अतिरिक्त मुद्दों में शामिल किया जा सकता है।
सुनवाई का सख्त टाइम टेबल और नोडल वकीलों की नियुक्ति
अदालत ने सुनवाई को व्यवस्थित बनाने के लिए एक सख्त समय-सारणी तैयार की है. 7 से 9 अप्रैल तक रिव्यू याचिकाकर्ताओं की बात सुनी जाएगी, जबकि 14 से 16 अप्रैल के बीच विरोधी पक्ष अपनी दलीलें रखेंगे. 21 अप्रैल को जवाबी दलीलें और अमीकस क्यूरी की दलीलें सुनी जाएंगी. कोर्ट ने सीनियर वकील के. परमेश्वर और सी.यू. सिंह को अमीकस क्यूरी के रूप में नियुक्त किया है जो कानूनी बारीकियों को समझने में पीठ की मदद करेंगे. सीजेआई ने सभी वकीलों को चेतावनी दी है कि वे तय समय का सख्ती से पालन करें ताकि मामला और ज्यादा न खिंचे. दो नोडल वकीलों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है जो दोनों पक्षों के दस्तावेजों को व्यवस्थित करेंगे।
केरल चुनाव और सरकार को मिलने वाली राहत
सबरीमाला मामले की सुनवाई 7 अप्रैल से शुरू होने के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं. केरल में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस तारीख का तय होना राज्य की मौजूदा एलडीएफ सरकार के लिए राहत की बात मानी जा रही है. तब तक चुनाव की घोषणा होने और आचार संहिता लागू होने की संभावना है, जिससे सरकार को मंदिर में महिलाओं के प्रवेश जैसे संवेदनशील मुद्दे पर तुरंत हलफनामा दाखिल करने की बाध्यता नहीं होगी. हालांकि विपक्षी दल इस मुद्दे को चुनावी अभियान में जोर-शोर से उठाने की तैयारी में हैं, लेकिन कानूनी मोर्चे पर सरकार को चुनाव खत्म होने तक का समय मिल सकता है।
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