आरडीजी ग्रांट बंद होना हिमाचल से अन्याय, OPS नहीं हटेगी: सीएम सुक्खू
सीएम सुक्खू ने आरडीजी ग्रांट बंद होने को हिमाचल के साथ अन्याय बताया। कहा- केंद्र भेदभाव कर रही, ओपीएस किसी भी सूरत में बंद नहीं होगी।
शिमला । दिल्ली में पार्टी मीटिंग के लिए रवाना होने से पहले शिमला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आरडीजी (रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट) बंद किए जाने से प्रदेश को होने वाले आर्थिक नुकसान को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सीएम सुक्खू ने आंकड़ों के माध्यम से कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल की अनदेखी कर रही है और कांग्रेस सरकार के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय संकट के बीच वित्त सचिव द्वारा दी गई प्रजेंटेशन में ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) छोड़कर यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) अपनाने की बात कही गई थी, साथ ही यह भी कहा गया था कि आरडीजी खत्म होने पर धन की कमी के कारण महंगाई भत्ता (डीए) फ्रीज करना पड़ सकता है। हालांकि सीएम सुक्खू ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसी भी सूरत में ओपीएस को बंद नहीं करेगी।
सीएम सुक्खू ने कहा, “11 दिसंबर 2022 को जब मैंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली पिछली सरकार को 54,256 करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में मिल चुके थे। इसके अलावा 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में मिले थे। लेकिन हमारी सरकार को तीन वर्षों में वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक केवल 17 हजार करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए। इसके बावजूद हमने आम जनता को कोई तकलीफ नहीं दी और सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को ओपीएस का लाभ दिया।”उन्होंने कहा कि वित्त सचिव के बयान के बावजूद ओपीएस बंद नहीं की जाएगी और सरकार अपने संसाधनों को मजबूत कर वित्तीय प्रबंधन में सुधार करेगी। सीएम ने कहा कि आरडीजी में भारी कटौती के बावजूद सरकार आगे बढ़ रही है और गरीबों से जुड़ी किसी भी योजना को बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने बीते तीन वर्षों में बेहतर निर्णयों के चलते तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया है।
हिमाचल का हक छीना जा रहा है: सीएम सुक्खू
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 फरवरी को वित्त मंत्री द्वारा 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट सदन में पेश किया जाना हिमाचल के इतिहास का काला दिन है। उन्होंने कहा कि संविधान की धारा 275 के तहत मिलने वाली आरडीजी को रोकना प्रदेश के अधिकारों पर कुठाराघात है। आरडीजी का उद्देश्य राजस्व घाटे और खर्च के बीच की खाई को पाटना होता है। सीएम सुक्खू ने बताया कि प्लानिंग कमेटी की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सहित सभी भाजपा विधायकों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कोई भी बैठक में शामिल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह राजनीति का नहीं बल्कि हिमाचल के हितों का सवाल है। प्रदेश का हक छीना जा रहा है और यह लड़ाई सरकार की नहीं बल्कि हिमाचल के किसानों, गरीबों और सभी वर्गों के अधिकारों की लड़ाई है।
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