बाबूजी’ ने जीत लिया धर्मशाला का दिल! कलाकारों के संघर्ष और समर्पण की कहानी के साथ ‘हिम रंग षष्ठी’ नाट्योत्सव का भव्य समापन

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के ‘हिम रंग षष्ठी’ ग्रीष्मकालीन नाट्योत्सव का धर्मशाला संस्करण ‘बाबूजी’ नाटक के मंचन के साथ संपन्न हुआ। नौटंकी शैली में प्रस्तुत नाटक ने कलाकारों के संघर्ष, समर्पण और सामाजिक चुनौतियों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया।

Jun 23, 2026 - 21:50
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बाबूजी’ ने जीत लिया धर्मशाला का दिल! कलाकारों के संघर्ष और समर्पण की कहानी के साथ ‘हिम रंग षष्ठी’ नाट्योत्सव का भव्य समापन
बाबूजी’ ने जीत लिया धर्मशाला का दिल! कलाकारों के संघर्ष और समर्पण की कहानी के साथ ‘हिम रंग षष्ठी’ नाट्योत्सव का भव्य समापन
बाबूजी’ ने जीत लिया धर्मशाला का दिल! कलाकारों के संघर्ष और समर्पण की कहानी के साथ ‘हिम रंग षष्ठी’ नाट्योत्सव का भव्य समापन

धर्मशाला।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) रंगमंडल द्वारा आयोजित ‘हिम रंग षष्ठी’ ग्रीष्मकालीन नाट्योत्सव के धर्मशाला संस्करण का सफल समापन चर्चित नाटक ‘बाबूजी’ के मंचन के साथ हुआ। समापन समारोह में अतिरिक्त उपायुक्त कांगड़ा विनय कुमार ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के निकट स्थित अंतरंग सभागार में आयोजित नाट्योत्सव के दूसरे और अंतिम दिन लेखक मिथिलेश्वर की चर्चित कहानी पर आधारित नाटक ‘बाबूजी’ का मंचन किया गया। नाटक का नाट्य रूपांतरण विभांशु वैभव ने किया, जबकि इसका निर्देशन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के प्रमुख राजेश सिंह ने किया।

लोकप्रिय नौटंकी शैली में प्रस्तुत इस संगीतप्रधान नाटक ने दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखा। सजीव संगीत, लोकधर्मी रंग शैली और प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से कलाकारों के जीवन संघर्ष को बेहद मार्मिक ढंग से मंच पर उतारा गया।

नाटक का केंद्रीय पात्र लल्लन सिंह उर्फ ‘बाबूजी’ एक ऐसे रंगकर्मी की कहानी प्रस्तुत करता है, जिसने सामाजिक अस्वीकृति, पारिवारिक विघटन और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद कला के प्रति अपना समर्पण कभी नहीं छोड़ा। यह पात्र उन हजारों कलाकारों का प्रतिनिधित्व करता है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी कला के प्रति निष्ठावान बने रहते हैं।

नाटक में पारिवारिक रिश्तों की जटिलता, सामाजिक पूर्वाग्रह, कलाकारों की असुरक्षा और कला के लिए किए जाने वाले त्याग को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति ने यह संदेश भी दिया कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति और जीवन-दृष्टि का एक सशक्त साधन है।

नाटक में राजेश सिंह, शिव प्रसाद, पूनम दहिया, शिल्पा भारती, अनंत शर्मा, सत्येन्द्र मलिक, अंकुर सिंह, प्रतीक वडेरा, आलोक कुमार, तबिश खान, मुजीबुर रहमान और अप्सरा खान ने अपनी प्रभावशाली अभिनय प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

उल्लेखनीय है कि ‘हिम रंग षष्ठी’ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के ‘रंग षष्ठी’ समारोह का हिस्सा है, जिसे रंगमंडल की स्थापना के 60 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत रंगमंडल अपनी चर्चित प्रस्तुतियों का मंचन विभिन्न शहरों में कर रहा है।

धर्मशाला के बाद इस नाट्य यात्रा का अगला पड़ाव शिमला होगा, जहां मॉल रोड स्थित गेइटी थिएटर में रंगमंडल अपनी चर्चित प्रस्तुतियों का मंचन करेगा।

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी प्रभात शर्मा, भाषा एवं संस्कृति विभाग के उपनिदेशक बिहारी लाल शर्मा, सहायक निदेशक अनिल हारटा, डीपीआरओ विनय शर्मा, कांगड़ा कला संग्रहालय की क्यूरेटर रितु मलकोटिया, डीपीओ प्लानिंग डॉ. अजय रत्न, डीएलओ कांगड़ा अमित गुलेरी, रंगकर्मी रोहित बोहरा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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