किसानों के लिए जाच्छ केंद्र की विशेषज्ञता लेने पर मंथन
केवल सिंह पठानिया ने जाच्छ बागवानी अनुसंधान केंद्र का दौरा किया। एचपी शिवा परियोजना के तहत किसानों को विशेषज्ञता का लाभ दिलाने पर मंथन हुआ।
नूरपुर से रघुनाथ शर्मा की रिपोर्ट
नूरपुर में उप सचेतक केवल सिंह पठानिया ने क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, जाच्छ का दौरा किया। इस दौरान एचपी शिवा परियोजना के तहत किसानों तक बागवानी विशेषज्ञता और तकनीकी जानकारी पहुंचाने की संभावनाओं पर मंथन किया गया।
केंद्र प्रबंधन ने विभिन्न शोध एवं प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी दी, जबकि पठानिया ने किसानों की आय बढ़ाने और मृदा स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर जोर दिया।
एचपी शिवा परियोजना से किसानों को जोड़ने पर जोर
उप सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि एचपी शिवा परियोजना के तहत फाउंडेशन गतिविधियों के लिए करीब 4 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करवाई गई है।
उन्होंने कहा कि जाच्छ स्थित क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र की विशेषज्ञता का लाभ क्षेत्र के किसानों तक पहुंचाने की संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्य से यह दौरा किया गया है।
पठानिया के अनुसार, केंद्र लंबे समय से किसानों के हित में काम कर रहा है और यहां विकसित तकनीक एवं उन्नत किस्मों का लाभ किसानों को मिल रहा है।
मिट्टी की सेहत को लेकर जताई चिंता
पठानिया ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से हाल ही में क्षेत्र के खेतों की मिट्टी का हाईटेक लैब में परीक्षण करवाया गया है। परीक्षण में मिट्टी में रसायनों के चौथी लेयर तक पहुंचने की बात सामने आई है।
उन्होंने इसे चिंता का विषय बताते हुए अधिकारियों और वैज्ञानिकों से किसानों को मृदा स्वास्थ्य तथा रसायनों के अत्यधिक इस्तेमाल के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया।
उन्होंने किसानों को नियमित रूप से खेतों की मिट्टी की जांच करवाने के लिए जागरूक करने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए।
हरड़, लसूढ़े और आम की किस्मों पर शोध
केंद्र के एसोसिएट डायरेक्टर एवं प्रमुख डॉ. विपिन गुलेरिया ने केंद्र में चल रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि:
- हरड़ और लसूढ़े की उन्नत किस्में विकसित की जा रही हैं।
- विकसित किस्मों को किसानों तक पहुंचाया जा रहा है।
- आम की विभिन्न किस्मों पर परीक्षण किया जा रहा है।
- आम की पूसा किस्म पर भी अनुसंधान एवं परीक्षण कार्य चल रहा है।
केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. रेणु ने बताया कि भविष्य में किसानों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मिट्टी परीक्षण और मृदा स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को भी शामिल किया जाएगा।
बरसाती पानी की निकासी की समस्या भी उठी
डॉ. विपिन गुलेरिया ने राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के कारण केंद्र परिसर में बरसात के पानी की निकासी से जुड़ी समस्या से भी उप सचेतक को अवगत करवाया।
इस पर केवल सिंह पठानिया ने कहा कि समस्या के समाधान के लिए एनएच के उच्च अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।
नाग मंदिर में पूजा-अर्चना, मुख्य गेट का आश्वासन
जाच्छ केंद्र के दौरे से पहले केवल सिंह पठानिया ने नाग मंदिर जठेरे पठानिया, नागाबाड़ी में पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेशवासियों की खुशहाली, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
इस दौरान मंदिर प्रबंधन और स्थानीय लोगों ने मंदिर का मुख्य गेट बनाने की मांग रखी। पठानिया ने मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष मंदिर तक पहुंचने के लिए फोरलेन पर फुटओवर ब्रिज बनाने की मांग रखी गई थी, जिसका निर्माण अब पूरा हो चुका है। उन्होंने क्षेत्र के धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों के विकास के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही।
कार्यक्रम में ये अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर एसडीएम अरुण शर्मा, एसएचओ सुरिंदर सहित विभागीय अधिकारी और स्थानीय गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
किसानों के लिए क्या संदेश?
जाच्छ में हुई चर्चा का सबसे अहम पहलू किसानों को वैज्ञानिक तकनीक, उन्नत बागवानी किस्मों और मृदा स्वास्थ्य से जोड़ना रहा। यदि शोध संस्थानों की विशेषज्ञता सीधे खेतों तक पहुंचती है, तो इससे किसानों को फसल चयन, मिट्टी प्रबंधन और आधुनिक बागवानी तकनीकों में व्यावहारिक मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष:
जाच्छ बागवानी केंद्र के दौरे में किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता और रसायनों के संतुलित इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया। अब देखना होगा कि अनुसंधान केंद्र की विशेषज्ञता और एचपी शिवा परियोजना के संसाधनों का लाभ कितनी तेजी से जमीनी स्तर पर किसानों तक पहुंचता है।
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