सुख आश्रय योजना बनी सहारा, बदल रही निराश्रित बच्चों की जिंदगी
हिमाचल की सुख आश्रय योजना से निराश्रित बच्चों को शिक्षा, आवास, पॉकेट मनी और स्वरोजगार सहायता मिल रही है। कांगड़ा में सैकड़ों बच्चे लाभान्वित।
संजीव भारद्वाज। धर्मशाला
माता-पिता का साया खो चुके बच्चों के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल के तहत निराश्रित बच्चों को "चिल्ड्रन ऑफ स्टेट" का दर्जा देकर उनके पालन-पोषण, शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी सरकार ने अपने हाथों में ली है।
योजना का उद्देश्य ऐसे बच्चों को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का अवसर प्रदान करना है।
क्या है मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना?
सुख आश्रय योजना के तहत राज्य सरकार 27 वर्ष तक की आयु वाले पात्र बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पालन-पोषण और अन्य आवश्यकताओं का खर्च वहन कर रही है।
योजना के प्रमुख लाभ
- प्रतिमाह 4,000 रुपये पॉकेट मनी
- उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता
- नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग
- छात्रावास सुविधा
- स्वरोजगार के लिए 2 लाख रुपये तक सहायता
- विवाह के लिए 2 लाख रुपये तक अनुदान
- घर निर्माण के लिए आर्थिक सहायता
- भूमि उपलब्ध न होने पर जमीन आवंटन की सुविधा
- शैक्षणिक भ्रमण और पिकनिक की व्यवस्था
लाभार्थियों की जुबानी बदली जिंदगी
दीक्षा की कहानी
धर्मशाला के दाड़ी गांव की रहने वाली दीक्षा बताती हैं कि माता-पिता के निधन के बाद परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। सुख आश्रय योजना के तहत मिली सहायता से उन्होंने अपने पुराने घर की मरम्मत करवाई और नए कमरे भी बनवाए।
उन्होंने कहा कि अब वह अपने भाई और दादी के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं।
अमित कुमार को मिला घर बनाने का सहारा
धर्मशाला के पास्सू निवासी अमित कुमार ने बताया कि योजना के तहत उन्हें घर निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये प्राप्त हुए हैं, जिससे उन्होंने अपने घर के चार कमरों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।
जयंतिका के सपनों को मिला नया घर
रजोल निवासी जयंतिका कहती हैं कि माता-पिता के निधन के बाद उनके सामने कई चुनौतियां थीं। सुख आश्रय योजना से मिली आर्थिक सहायता के कारण वह और उनका भाई अपना घर बनाने में सफल हुए हैं।
कांगड़ा में सैकड़ों बच्चे हो रहे लाभान्वित
जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) अशोक शर्मा के अनुसार मई 2026 तक जिला कांगड़ा में 719 बच्चों को सामाजिक सुरक्षा के रूप में लगभग 57 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
प्रमुख आंकड़े
- 719 बच्चों को 57 लाख रुपये की सहायता
- टोंग लेन ट्रस्ट के 200 बच्चों को 6.25 लाख रुपये
- प्रत्येक बच्चे को 500 रुपये मासिक उत्सव भत्ता
- गृह निर्माण के लिए 36 आवेदन स्वीकृत
- लाभार्थियों को पहली किस्त के रूप में 1-1 लाख रुपये जारी
- दो चिल्ड्रन ऑफ स्टेट को भूमि उपलब्ध करवाई गई
उपायुक्त ने बताया योजना का उद्देश्य
उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना राज्य सरकार की एक संवेदनशील और मानवीय पहल है। इसके माध्यम से सरकार उन बच्चों की अभिभावक की भूमिका निभा रही है, जो पारिवारिक संरक्षण से वंचित हैं।
उन्होंने कहा कि इन बच्चों को केवल सहायता नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य देने का प्रयास किया जा रहा है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा का एक अनूठा मॉडल बनकर उभरी है। यह योजना उन बच्चों के जीवन में नई उम्मीद जगा रही है, जिन्होंने कम उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया। शिक्षा, आवास और आत्मनिर्भरता की दिशा में यह पहल सैकड़ों बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे रही है।
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