टांडा मेडिकल कॉलेज में रक्त संकट के बीच जुटे 70 रक्तदाता

टांडा मेडिकल कॉलेज में रक्त की कमी को देखते हुए रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। 70 यूनिट रक्त एकत्र हुआ, जिसमें से 40 यूनिट मरीजों के लिए तुरंत जारी की गईं।

Jun 4, 2026 - 19:30
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टांडा मेडिकल कॉलेज में रक्त संकट के बीच जुटे 70 रक्तदाता

सुमन महाशा। कांगड़ा
डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज (डीआरपीजीएमसी) टांडा में रक्त की गंभीर कमी को देखते हुए गुरुवार को विशेष रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कॉलेज के चिकित्सकों, विद्यार्थियों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और मानवता की अनूठी मिसाल पेश की।

शिविर के दौरान कुल 70 यूनिट रक्त एकत्र किया गया, जिनमें से 40 यूनिट रक्त शाम 4 बजे तक जरूरतमंद मरीजों के लिए जारी भी कर दिया गया।

रक्त की बढ़ती मांग को देखते हुए उठाया गया कदम

मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार ब्लड सेंटर में रक्त की उपलब्धता लगातार कम हो रही थी, जबकि मरीजों के लिए रक्त की आवश्यकता लगातार बढ़ रही थी। इसी स्थिति को देखते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. विवेक तथा इम्यूनोहैमेटोलॉजी एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग की अध्यक्ष डॉ. अंजली चव्हाण की पहल पर यह शिविर आयोजित किया गया।

सभी वर्गों ने निभाई अपनी जिम्मेदारी

रक्तदान शिविर में मेडिकल कॉलेज के विभिन्न वर्गों ने स्वेच्छा से भाग लिया।

रक्तदान करने वालों में शामिल रहे:

  • फैकल्टी सदस्य
  • चिकित्सक
  • एमबीबीएस विद्यार्थी
  • सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर
  • स्टाफ नर्स
  • मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट
  • रेडियोग्राफी छात्र
  • लिपिकीय कर्मचारी
  • सहायक स्टाफ

सभी ने समाज सेवा और मानवता के भाव से रक्तदान कर मरीजों की मदद के लिए अपना योगदान दिया।

ब्लड सेंटर की टीम ने संभाली कमान

रक्तदान शिविर को सफल बनाने में ब्लड सेंटर की पूरी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम ने बिना रुके रक्त संग्रह, जांच, रक्त अवयव तैयार करने और जरूरतमंद मरीजों तक रक्त पहुंचाने का कार्य किया।

रक्तदान के साथ-साथ ब्लड टेस्टिंग, क्रॉस मैचिंग और ब्लड कंपोनेंट तैयार करने की प्रक्रिया को भी तेजी से पूरा किया गया, जिससे मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सके।

क्यों जरूरी है स्वैच्छिक रक्तदान?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दुर्घटनाओं, ऑपरेशन, प्रसव और गंभीर बीमारियों के दौरान मरीजों को रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान कई जिंदगियां बचाने में अहम भूमिका निभाता है।

रक्तदान के प्रमुख लाभ

  • एक यूनिट रक्त कई मरीजों की मदद कर सकता है।
  • रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है।
  • नियमित रक्तदान से सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन होता है।
  • जरूरतमंद मरीजों को समय पर जीवनरक्षक सहायता मिलती है।

मानवता का संदेश

मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने लोगों से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि रक्त की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में समाज के हर सक्षम व्यक्ति को रक्तदान कर मानव जीवन बचाने में योगदान देना चाहिए।

"मानवता की एक बूंद, जीवन की नई उम्मीद"

रक्तदान शिविर के दौरान यही संदेश दिया गया कि—

"One Drop of Humanity, Give Blood – Save Lives"

निष्कर्ष

टांडा मेडिकल कॉलेज में आयोजित यह रक्तदान शिविर केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और मानवता का उदाहरण बनकर सामने आया। रक्त संकट के समय 70 यूनिट रक्त का संग्रहण कई मरीजों के लिए जीवनदायी साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित और स्वैच्छिक रक्तदान ही भविष्य में ऐसे संकटों से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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