कांगड़ा में GAV शिक्षकों ने सीखे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के गुर
GAV Public School Kangra में CBSE वर्कशॉप आयोजित, शिक्षकों ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और डिजिटल संतुलन के प्रभावी उपाय सीखे।
सुमन महाशा। कांगड़ा
कांगड़ा स्थित GAV Public School में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से CBSE की विशेष वर्कशॉप आयोजित की गई। कार्यशाला में शिक्षकों को विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव, मानसिक दबाव और डिजिटल प्रभावों को समझने तथा उनसे निपटने के प्रभावी उपायों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद “Mental Health and Well Being Among Students” विषय पर आयोजित वर्कशॉप में रिसोर्स पर्सन अनुराग शर्मा और मनोज जोशी ने शिक्षकों को विस्तार से जानकारी दी। प्रधानाचार्य डॉ. सुरेश शर्मा ने दोनों विशेषज्ञों का परिचय करवाते हुए कहा कि आज के दौर में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को समझना बेहद जरूरी हो गया है।
छात्रों में बढ़ रहा मानसिक दबाव
रिसोर्स पर्सन अनुराग शर्मा ने बताया कि आज के समय में विद्यार्थियों पर पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य को लेकर लगातार दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, दूसरों से तुलना और खुद को साबित करने की होड़ भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है।
उन्होंने कहा कि घर से दूर रहने वाले या नए माहौल में सामंजस्य बैठाने में कठिनाई महसूस करने वाले छात्रों में अकेलापन और निराशा जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
मानसिक तनाव के संकेतों को पहचानना जरूरी
वर्कशॉप के दौरान मनोज जोशी ने शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकेतों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि यदि किसी छात्र में ये बदलाव दिखाई दें तो उस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है—
- पढ़ाई में रुचि कम होना
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
- अत्यधिक तनाव और थकान
- नींद से जुड़ी समस्याएं
- सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाना
- आत्मविश्वास में कमी और नकारात्मक सोच
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में समय रहते संवाद और सहयोग बेहद जरूरी होता है।
छात्रों के लिए बताए गए प्रभावी उपाय
विशेषज्ञों ने बताया कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कुछ जरूरी कदम अपनाए जाने चाहिए—
- संतुलित दिनचर्या और पर्याप्त नींद
- पौष्टिक भोजन और नियमित व्यायाम
- योग, ध्यान और प्राणायाम
- सोशल मीडिया और मोबाइल का सीमित उपयोग
- रचनात्मक गतिविधियों में भागीदारी
- भावनाओं को खुलकर साझा करने का माहौल
उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों को ऐसा सहयोगात्मक वातावरण तैयार करना चाहिए जहां छात्र बिना किसी डर के अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
स्कूलों में काउंसलिंग और गतिविधियों पर जोर
वर्कशॉप में सुझाव दिया गया कि शिक्षण संस्थानों में नियमित काउंसलिंग सत्र, तनाव प्रबंधन कार्यशालाएं और हेल्पलाइन सेवाएं उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। साथ ही खेल, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देना जरूरी है ताकि विद्यार्थियों का समग्र विकास हो सके।
मानसिक रूप से स्वस्थ छात्र ही बनाते हैं बेहतर भविष्य
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक प्रगति का भी आधार है। स्वस्थ मानसिक स्थिति वाले छात्र ही आत्मविश्वासी, रचनात्मक और सफल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
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