कांगड़ा में जुटे देश-विदेश के वैज्ञानिक! हरित ऊर्जा और क्वांटम तकनीक पर शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय मंथन
एमसीएम डीएवी कॉलेज कांगड़ा में “डेटा-संचालित क्वांटम युग में हरित ऊर्जा एवं आपदा प्रतिरोधकता में बहुविषयक नवाचार” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।
कांगड़ा। सुमन महाशा
एमसीएम डीएवी कॉलेज कांगड़ा में “डेटा-संचालित क्वांटम युग में हरित ऊर्जा एवं आपदा प्रतिरोधकता में बहुविषयक नवाचार” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सोमवार को भव्य शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों के छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, शिमला के प्रबंध निदेशक राम कुमार गौतम (आईएएस) ने शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति ज्ञान, वैज्ञानिक सोच और शोध आधारित विकास पर निर्भर करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि ने भारतीय संस्कृति, सभ्यता और नैतिक मूल्यों की महत्ता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान और तकनीकी विकास के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और ज्ञान व संस्कारों के समन्वय से समाज निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया गया।
सम्मेलन के मुख्य वक्ता प्रो. एन.एस. नेगी, भौतिकी विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला रहे। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीन अनुसंधानों और उनके सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय अंतर्विषयक शोध का युग है और जटिल चुनौतियों का समाधान विभिन्न विषयों के समन्वित प्रयासों से ही संभव है।
सम्मेलन के प्रथम आमंत्रित वक्ता एवं उद्यमी विजय अरोड़ा ने नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने युवाओं को केवल रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजनकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया तथा नवाचार आधारित उद्यमों की अपार संभावनाओं पर चर्चा की।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बलजीत सिंह पटियाल ने मुख्य अतिथि, वक्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विद्यार्थियों और शोधार्थियों को वैश्विक स्तर के विशेषज्ञों के साथ संवाद स्थापित करने और नवीन शोध प्रवृत्तियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज शोध संस्कृति और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. रजनीश ठाकुर ने बताया कि तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान तकनीकी सत्र, मौखिक शोध-पत्र प्रस्तुतियां, पोस्टर प्रस्तुतियां और युवा शोधकर्ता सत्र आयोजित किए जाएंगे। सम्मेलन का उद्देश्य हरित ऊर्जा, आपदा प्रतिरोधकता, डेटा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बहुविषयक शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन ज्ञान के आदान-प्रदान, शोध सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आगामी दिनों में विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, शोध प्रस्तुतियां और विचार-विमर्श के माध्यम से समकालीन चुनौतियों तथा उनके समाधान पर गहन चर्चा की जाएगी।
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