एमसीएम डीएवी कांगड़ा: अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा दिन रहा ज्ञानवर्धक
एमसीएम डीएवी कॉलेज कांगड़ा में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन बहुविषयक शोध, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और नई तकनीकों पर गहन मंथन हुआ।
सुमन महाशा। कांगड़ा
एमसीएम डीएवी कॉलेज कांगड़ा में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन शैक्षणिक गतिविधियाँ अपने चरम पर रहीं। देश-विदेश से आए शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने बहुविषयक अनुसंधान, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और उभरती वैज्ञानिक चुनौतियों पर गहन विचार साझा किए।
अमेरिका से आए प्रो. अहमद का प्रेरणादायक व्याख्यान
दूसरे दिन के पहले आमंत्रित वक्ता प्रोफेसर अहमद (ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका) रहे।
उन्होंने—
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे नवीन शोध कार्यों
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बहुविषयक अनुसंधान (Multidisciplinary Research)
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भविष्य की शैक्षणिक चुनौतियों
पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनका व्याख्यान प्रतिभागियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा।
वैज्ञानिक शोध की व्यावहारिक उपयोगिता पर बल
दूसरे आमंत्रित वक्ता बलबीर सिंह कैथ ने कहा कि—
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विज्ञान और शोध को समाज की जरूरतों से जोड़ना समय की मांग है
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युवाओं को अनुसंधान के लिए प्रेरित करना आवश्यक है
उन्होंने जनसंख्या विस्फोट, सीमित संसाधनों और अनिश्चित वर्षा पैटर्न जैसी चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। साथ ही बताया कि दूसरी हरित क्रांति (सदाबहार क्रांति) लाने में पॉलिमर सामग्री महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पर्यावरण, ऊर्जा और जलवायु पर गहन चर्चा
तीसरे वक्ता डॉ. विवेक गुप्ता (CSIR पालमपुर) ने प्रकाश संश्लेषण और पादप-पर्यावरण अंतःक्रियाओं पर व्याख्यान दिया।
इसके अतिरिक्त—
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प्रो. एम.एस. ठाकुर (HPU) – हिमालयी औषधीय पौधों व जलवायु परिवर्तन
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प्रो. वी. कृष्णन (IIT मंडी) – ऊर्जा व पर्यावरण हेतु सतत उत्प्रेरक
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डॉ. महेश शर्मा (HPU) – हिमालयी क्षेत्र में अचानक बाढ़ पर केस स्टडी
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पूनम सैनी (PEC चंडीगढ़) – AI और डेटा एनालिटिक्स के वैज्ञानिक अनुप्रयोग
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मनीष ठाकुर (HPU शिमला) – सौर ऊर्जा और जलवायु-लचीली खेती
जैसे विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं।
18 शोधार्थियों ने दी ओरल प्रेजेंटेशन
सम्मेलन के दूसरे दिन 18 प्रतिभागियों ने ओरल प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए, जिससे अकादमिक संवाद और अधिक समृद्ध हुआ।
निष्कर्ष
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा दिन शोध, नवाचार और वैश्विक दृष्टिकोण के आदान-प्रदान के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा। ऐसे मंच न केवल छात्रों और शोधकर्ताओं को नई दिशा देते हैं, बल्कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों को वैश्विक शैक्षणिक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करते हैं।
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