एमसीएम डीएवी कॉलेज कांगड़ा में गूंजा वैश्विक शोध का स्वर! तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य समापन
एमसीएम डीएवी कॉलेज कांगड़ा में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल समापन हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने हरित ऊर्जा, आपदा प्रत्यास्थता और नवाचार से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।
कांगड़ा। सुमन महाशा
MCM DAV College Kangra में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “हरित ऊर्जा एवं आपदा प्रत्यास्थता में बहुविषयक नवाचार : डेटा-संचालित क्वांटम युग के संदर्भ में” का सफलतापूर्वक समापन हो गया। सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा शोध, नवाचार और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन के दौरान कुल 18 मौखिक (ओरल) तथा 22 पोस्टर शोध प्रस्तुतियां आयोजित की गईं, जिनमें प्रतिभागियों ने अपने शोध कार्यों और नवीन विचारों को साझा किया।
सम्मेलन में King Saud University के प्रतिष्ठित विद्वान Prof. Dr. Khalid Mujjassam Battu ने ऑनलाइन माध्यम से विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर अनुसंधान और नवाचार के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बहुविषयक अध्ययन वर्तमान समय की जटिल चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को मानव समाज के लिए उपयोगी बताया।
समापन दिवस पर आयोजित तकनीकी सत्र में Dr. Indu Sharma ने विज्ञान एवं अनुसंधान के नवीन आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए और विद्यार्थियों को शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
इसके पश्चात Dr. Dipali Sharma ने स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास में अनुसंधान की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैज्ञानिक सोच और शोध आधारित कार्य समाज के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वहीं Dr. Mahesh Sharma ने आपदा प्रबंधन, सुरक्षित आधारभूत संरचना और सतत विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आधुनिक तकनीकों के माध्यम से आपदा जोखिम को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में Prof. Mahavir Singh उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि उस ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और रचनात्मक चिंतन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य Dr. Baljeet Singh Patial ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शोधार्थियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विद्यार्थियों और शिक्षकों को वैश्विक विशेषज्ञों के साथ संवाद स्थापित करने तथा नवीन शोध प्रवृत्तियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
सम्मेलन के आयोजन सचिव Dr. Rajnish Thakur ने आयोजन की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नए विचारों के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ है।
समापन समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। महाविद्यालय के विभागाध्यक्षों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों की उपस्थिति में सम्मेलन का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ।
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