एमसीएम डीएवी कांगड़ा में शोध का महाकुंभ, दूसरे दिन गूंजे नवाचार के स्वर
एमसीएम डीएवी कॉलेज कांगड़ा में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन हरित ऊर्जा, क्वांटम तकनीक, एआई और आपदा प्रबंधन पर शोध एवं अकादमिक विमर्श हुआ।
सुमन महाशा। कांगड़ा
कांगड़ा स्थित एम.सी.एम. डी.ए.वी. कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन शोध, नवाचार और अकादमिक विमर्श का माहौल देखने को मिला। देश-विदेश से पहुंचे शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने आधुनिक विज्ञान, तकनीक और सामाजिक चुनौतियों से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा की।
“डेटा-संचालित क्वांटम युग में हरित ऊर्जा एवं आपदा प्रत्यास्थता में बहुविषयक नवाचार” विषय पर आधारित इस सम्मेलन में विभिन्न तकनीकी और अकादमिक सत्रों का सफल आयोजन किया गया।
बहुविषयक शोध की बढ़ती आवश्यकता पर जोर
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बलजीत सिंह पटियाल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बहुविषयक अनुसंधान की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा, डेटा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्र भविष्य की दिशा तय करने वाले विषय हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नवीनतम शोध, तकनीक और नवाचार से जोड़ने का प्रभावी मंच प्रदान करते हैं।
विशेषज्ञों ने साझा किए अपने अनुभव
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
प्रमुख वक्ताओं के मुख्य विषय
• डॉ. एस. एन. घोष (एचपीयू शिमला) ने मानसिक स्वास्थ्य और आधुनिक तकनीकी युग में मनोविज्ञान की भूमिका पर प्रकाश डाला।
• डॉ. शशि कांत शर्मा ने मीडिया, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी के बदलते स्वरूप पर विचार व्यक्त किए।
• डॉ. अरुण कुमार (सीएसआईआर-आईएचबीटी पालमपुर) ने जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान के नए आयामों पर चर्चा की।
• डॉ. सुनील कुमार (केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश) ने जीवन विज्ञान और पर्यावरणीय चुनौतियों से जुड़े शोध अवसरों पर प्रकाश डाला।
• डॉ. रमेश ठाकुर ने हरित रसायन और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों की उपयोगिता को रेखांकित किया।
• डॉ. खेम राज ने विज्ञान और मानविकी के समन्वय को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।
चीन से आए विद्वान ने साझा किए वैश्विक शोध दृष्टिकोण
सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय विद्वान डॉ. ब्रिज मोहन, प्रोफेसर, हैनान नॉर्मल विश्वविद्यालय, चीन ने डेटा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक अकादमिक सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि डेटा आधारित तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों के प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उनके व्याख्यान को प्रतिभागियों ने विशेष रुचि के साथ सुना।
शोध-पत्र प्रस्तुतियों में दिखी नवाचार की झलक
सम्मेलन के दौरान शोधार्थियों द्वारा अपने नवीन अनुसंधान कार्य भी प्रस्तुत किए गए।
प्रस्तुति सत्रों की प्रमुख उपलब्धियां
- 13 शोध-पत्रों की ओरल प्रेजेंटेशन
- 22 शोध-पत्रों की पोस्टर प्रेजेंटेशन
- विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की सहभागिता
- विशेषज्ञों से शोधार्थियों को मार्गदर्शन
भविष्य की चुनौतियों के समाधान का मंच
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. रजनीश ठाकुर ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को एक साझा मंच उपलब्ध करवाना है।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन में प्रस्तुत शोध और विचार भविष्य की वैज्ञानिक, सामाजिक तथा पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
निष्कर्ष
एमसीएम डीएवी कॉलेज कांगड़ा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा दिन ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के नाम रहा। हरित ऊर्जा, एआई, क्वांटम तकनीक और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर हुई चर्चा ने शोधार्थियों और विद्यार्थियों को नई दिशा प्रदान की। ऐसे आयोजन हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मानचित्र पर और अधिक मजबूत पहचान दिलाने में सहायक साबित हो रहे हैं।
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