मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना से कांगड़ा के 746 बच्चों को मिला सहारा
मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत कांगड़ा जिले के 746 अनाथ, निराश्रित व जरूरतमंद बच्चों को लाभ मिला। गत वित्त वर्ष में 7.33 करोड़ रुपये विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च किए गए।
संजीव भारद्वाज। धर्मशाला
मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत कांगड़ा जिले के 746 अनाथ, निराश्रित, परित्यक्त और उपेक्षित बच्चों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार गत वित्त वर्ष में इन बच्चों के कल्याण के लिए 7 करोड़ 33 लाख रुपये खर्च किए गए।
उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने बुधवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को पात्र लाभार्थियों तक सभी सरकारी योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के निर्देश दिए।
विभिन्न योजनाओं की हुई समीक्षा
बैठक में इन प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई—
- मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना
- पोषण अभियान
- मिशन शक्ति
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
- सखी वन स्टॉप सेंटर
- आंगनवाड़ी सेवाएं
- किशोरी बालिका कार्यक्रम
- अन्य महिला एवं बाल कल्याण योजनाएं
उपायुक्त ने कहा कि विभाग को फील्ड स्तर पर पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
सुख आश्रय योजना में किस मद पर कितना खर्च हुआ?
गत वित्त वर्ष में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत विभिन्न मदों में सहायता प्रदान की गई—
- सामाजिक सुरक्षा: ₹90.91 लाख
- गृह निर्माण सहायता: ₹2.94 करोड़
- विवाह अनुदान: ₹2.56 करोड़
- उच्च शिक्षा सहायता: ₹48.85 लाख
- प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग: ₹4.43 लाख
- स्वरोजगार सहायता: ₹39.20 लाख
मिशन वात्सल्य और सुख शिक्षा योजना से भी मिला लाभ
उपायुक्त ने बताया कि—
- मिशन वात्सल्य के तहत 6,024 पात्र लाभार्थियों की पहचान कर 1.73 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
- संस्थागत देखरेख में रह रहे 209 बच्चों के लिए पॉकेट मनी, त्योहार, वस्त्र और पोषण अनुदान पर 19 लाख रुपये खर्च किए गए।
- इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत 0 से 18 वर्ष तक के 5,163 बच्चों को 3.02 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
प्रतिभावान बच्चों को मिलेगा अतिरिक्त सहयोग
डीसी हेमराज बैरवा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में ऐसे प्रतिभाशाली एवं जरूरतमंद बच्चों की पहचान कर उन्हें सरकारी योजनाओं के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से भी आर्थिक और शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी प्रतिभा संसाधनों के अभाव में प्रभावित न हो।
उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से आने वाले मामलों पर त्वरित कार्रवाई की भी सराहना की और सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार लाने के निर्देश दिए।
बैठक में रहे मौजूद
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेंद्र जसवाल, जिला कल्याण अधिकारी साहिल मंडला, जिला आयुष अधिकारी डॉ. ब्रिज नंदन शर्मा, जिला पंचायत अधिकारी सचिन ठाकुर, सभी सीडीपीओ तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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