35 वर्षों की नौकरी के बाद सेवानिवृत्त हुए धनेटा स्कूल के प्रिंसिपल
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धनेटा के प्रधानाचार्य राज कुमार सिंह 35 वर्षों की उत्कृष्ट, समर्पित एवं सफल शैक्षणिक सेवा पूर्ण करने के उपरांत मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए।
रूहानी नरयाल। नादौन
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धनेटा के प्रधानाचार्य राज कुमार सिंह 35 वर्षों की उत्कृष्ट, समर्पित एवं सफल शैक्षणिक सेवा पूर्ण करने के उपरांत मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में भव्य एवं गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उन्हें भावभीनी विदाई देते हुए उनके स्वस्थ, सुखी एवं सम्मानपूर्ण सेवानिवृत्त जीवन की मंगलकामनाएं दीं। समारोह के दौरान विद्यालय परिवार ने राज कुमार सिंह को सम्मानित किया तथा शॉल एवं हिमाचली टोपी पहनाकर उनके प्रति सम्मान एवं शुभकामनाएं व्यक्त कीं। अपने संबोधन में राज कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से ईमानदार, अनुशासित एवं संस्कारी नागरिक बनने का आह्वान करते हुए कहा कि नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर तथा कठिन परिश्रम और सकारात्मक सोच के बल पर जीवन की हर मंजिल प्राप्त की जा सकती है। विद्यालय के प्रति अपने स्नेह और जुड़ाव का परिचय देते हुए उन्होंने विद्यालय के विकास कार्यों के लिए अपनी ओर से 21 हजार रुपये की सहयोग राशि भी प्रदान की। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी किरण ठाकुरने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता का आधार अनुशासन, परिश्रम और अच्छे संस्कार हैं। इस दौरान उनके पुत्र अर्चित तथा पुत्रियां हिमांशी और शिवांशी भी उपस्थित रहीं। विद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने श्री राज कुमार सिंह के सरल, सौम्य एवं मिलनसार व्यक्तित्व, कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी तथा प्रेरणादायी नेतृत्व की मुक्तकंठ से सराहना की। राज कुमार सिंह ने अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत वर्ष 1991 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कानम, जिला किन्नौर में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता के रूप में की थी। उन्होंने वर्ष 1985 में कांगू से मैट्रिक तथा डी.ए.वी. कॉलेज, चंडीगढ़ से वर्ष 1991 में एम.एससी. रसायन विज्ञान की उपाधि प्राप्त की। अपने लंबे सेवाकाल में उन्होंने विभिन्न विद्यालयों में प्रधानाचार्य के रूप में कार्य करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन, नैतिक मूल्यों तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
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