संस्कृत में छिपा है NSS का मूल भाव: डॉ. अरुणदीप शर्मा
डीएवी कॉलेज कांगड़ा के एनएसएस शिविर में डॉ. अरुणदीप शर्मा ने संस्कृत सूक्तियों के माध्यम से सेवा, संस्कार और राष्ट्रसेवा का महत्व बताया।
सुमन महाशा। कांगड़ा
डीएवी कॉलेज कांगड़ा में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) विशेष शिविर का तीसरा दिन संस्कार, संस्कृति और सेवा भावना से ओतप्रोत रहा। शिविर का आयोजन कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बलजीत सिंह पटियाल के कुशल मार्गदर्शन में प्रेरणादायक वातावरण में किया गया।
संस्कृत: केवल भाषा नहीं, जीवन जीने की पद्धति
मुख्य वक्ता डॉ. अरुणदीप शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि जीवन जीने की वैज्ञानिक, नैतिक और सांस्कृतिक पद्धति है।
उन्होंने बताया कि संस्कृत साहित्य में निहित संस्कार व्यक्ति के—
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चरित्र निर्माण
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सामाजिक उत्तरदायित्व
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राष्ट्रसेवा की भावना
को मजबूत करते हैं।
संस्कृत सूक्तियों में झलकता है एनएसएस का दर्शन
डॉ. अरुणदीप शर्मा ने संस्कृत सूक्तियों के माध्यम से एनएसएस के मूल भावों को सरल शब्दों में समझाया—
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“सेवा परमो धर्मः” — समाज सेवा ही सर्वोच्च धर्म
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“सर्वे भवन्तु सुखिनः” — समावेशी और सामूहिक चेतना
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“वसुधैव कुटुम्बकम्” — विश्व-बंधुत्व और सामाजिक समरसता
उन्होंने कहा कि यही सिद्धांत एनएसएस की कार्यशैली और सोच का आधार हैं।
सेवा कार्यों से होता है व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास
डॉ. शर्मा ने उदाहरण देते हुए बताया कि—
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स्वच्छता अभियान
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पर्यावरण संरक्षण
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रक्तदान
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सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम
जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्वयंसेवक समाज सेवा के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व का भी सर्वांगीण विकास करते हैं। संस्कृत ग्रंथों में वर्णित अनुशासन, करुणा, सहयोग और कर्तव्यबोध एनएसएस के हर कार्य में दिखाई देता है।
एनएसएस विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनाता है: प्राचार्य
कार्यक्रम के अंत में कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. बलजीत सिंह पटियाल ने कहा कि एनएसएस शिविर विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे व्याख्यान विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
निष्कर्ष
एनएसएस शिविर के तीसरे दिन का सत्र ज्ञानवर्धक, संस्कारपूर्ण और प्रेरणादायक रहा। स्वयंसेवकों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में सेवा कार्यों को और अधिक समर्पण भाव से करने का संकल्प लिया।
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