धर्मशाला कॉलेज मामला: SC छात्रा केस में एट्रोसिटी एक्ट की मांग
धर्मशाला डिग्री कॉलेज की SC छात्रा मामले में अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा ने रैगिंग, मारपीट व उत्पीड़न के आरोपों पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत FIR की मांग की।
सुमन महाशा। कांगड़ा
धर्मशाला डिग्री कॉलेज से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा (पंजीकृत, नई दिल्ली) ने कॉलेज से जुड़ी एक अनुसूचित जाति की छात्रा के मामले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
क्या है पूरा मामला? (आरोपों के अनुसार)
महासभा के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुदेश सहोंत्रा के अनुसार, धर्मशाला डिग्री कॉलेज की द्वितीय वर्ष की 19 वर्षीय छात्रा के साथ—
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कॉलेज परिसर में रैगिंग
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कुछ छात्राओं द्वारा मारपीट
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सिर पर बोतल से वार
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जातिसूचक टिप्पणियों के आरोप
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तथा एक प्रोफेसर पर अनुचित स्पर्श (गलत नीयत से) के गंभीर आरोप लगाए गए हैं
इन घटनाओं के बाद छात्रा के मानसिक रूप से डिप्रेशन में जाने और उसकी हालत गंभीर होने की बात कही गई है।
नोट: ये सभी बिंदु संगठन द्वारा लगाए गए आरोप हैं, जिनकी जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जानी है।
प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल
महासभा का आरोप है कि—
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घटना के बाद समय पर FIR दर्ज नहीं की गई
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पहले शिकायत के बावजूद दो महीनों तक कार्रवाई नहीं हुई
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अब मामले को रफा-दफा करने के प्रयास किए जा रहे हैं
इसी को लेकर शासन-प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं।
एट्रोसिटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा ने मांग की है कि—
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मामले में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत FIR दर्ज हो
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आरोपित प्रोफेसर, कथित रूप से मारपीट में शामिल छात्रा
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और लापरवाही के आरोप झेल रहे पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हो
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निष्पक्ष न्यायिक जांच सुनिश्चित की जाए
संगठन ने स्पष्ट किया है कि जांच कोर्ट के माध्यम से चलती रहे, लेकिन दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
“बेटी बचाओ” के दावों पर सवाल
महासभा ने कहा कि एक ओर “बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ” जैसे अभियान चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अनुसूचित जाति की बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री से की गई अपील
संगठन ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि—
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इस मामले को IGMC शिमला जैसे संवेदनशील मामलों की तर्ज पर गंभीरता से लिया जाए
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किसी भी स्तर पर समझौते की गुंजाइश न हो
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पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाया जाए
साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो अन्य संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा।
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक छात्रा से जुड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, महिला सुरक्षा और व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न बन गया है। अब सबकी निगाहें प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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