मोबाइल छोड़ योग अपनाने की सीख! कांगड़ा के स्कूल में विद्यार्थियों ने लिया संस्कारवान बनने का संकल्प
कांगड़ा के जीडी गोयनका स्कूल चैतड़ू धर्मशाला में आयोजित विद्यार्थी संस्कार शिविर में छात्रों को योग, अध्यात्म, भारतीय संस्कृति और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया गया। योगाचार्य रजनेश कुमार ने योग के माध्यम से संस्कारवान और चरित्रवान बनने की प्रेरणा दी।
धर्मशाला ।
जिला कांगड़ा के चैतड़ू स्थित जीडी गोयनका स्कूल में विद्यार्थी संस्कार शिविर के तहत पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के तत्वावधान में नि:शुल्क योग शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का संचालन योगाचार्य एवं पूर्णकालिक सेवाव्रती रजनेश कुमार ने किया, जबकि योग प्रचारक रजिन्द्र सिंह ने कार्यक्रम की जानकारी साझा की।
शिविर में छात्र-छात्राओं को अष्टांग योग के महत्व से अवगत करवाते हुए बताया गया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासित और संस्कारवान बनाने का माध्यम है। विद्यार्थियों को जंक फूड, मैदे से बनी वस्तुओं, कोल्ड ड्रिंक्स और मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से दूर रहने की सलाह दी गई।
योगाचार्य ने श्रीमद्भागवत गीता, रामायण तथा भारतीय संस्कृति के मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को नैतिक शिक्षा और गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व समझाया। शिविर के दौरान योगिंग-जॉगिंग, सूर्य नमस्कार, सूक्ष्म व्यायाम, विभिन्न योगासन तथा भस्त्रिका, कपालभाति, उज्जायी और अनुलोम-विलोम प्राणायाम का अभ्यास करवाया गया।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति प्रतिदिन एक से दो घंटे योग और प्राणायाम को समर्पित करे तो वह अनेक रोगों से बचकर स्वस्थ जीवन जी सकता है। साथ ही दैनिक दिनचर्या, संतुलित खान-पान, अध्यात्म और गुरु महिमा पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
स्कूल की प्रधानाचार्य प्रियंका टांक ने कहा कि महर्षि पतंजलि द्वारा बताए गए योग दर्शन की आज के समय में विशेष आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी नशे और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं की ओर बढ़ रही है, जबकि योग उन्हें सही दिशा और स्वस्थ जीवन प्रदान कर सकता है।
कार्यक्रम में स्कूल प्रबंधक हिमांशु टांक, अध्यापक सुशीला मेहता, मुंजन, अर्चना सहित अनेक विद्यार्थियों और स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया। शिविर का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ तथा स्कूल स्टाफ ने योगाचार्य रजनेश कुमार को औषधीय पौधा भेंट कर सम्मानित किया।
विशेष बात यह रही कि योगाचार्य रजनेश कुमार ने विद्यालय परिसर में अपने जीवन का 280वां पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। कार्यक्रम का समापन सिंहासन, हास्यासन और शांति पाठ के साथ हुआ।
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