कांगड़ा में गूंजा 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का संदेश
कांगड़ा के पलेरा और नंदरुल पंचायतों में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। नुक्कड़ नाटक और गीतों के जरिए बेटियों की शिक्षा व आत्मनिर्भरता का संदेश दिया गया।
सुमन महाशा। कांगड़ा
बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कांगड़ा की पलेरा और नंदरुल पंचायतों में 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन बाल विकास परियोजना कार्यालय कांगड़ा के सौजन्य से किया गया।
इस दौरान ग्रामीणों को बेटियों की शिक्षा और समान अवसरों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भी प्रभावशाली संदेश दिया गया।
बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने का दिया संदेश
बाल विकास परियोजना अधिकारी संदीप बग्गा ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज की प्रगति के लिए बेटियों का शिक्षित और आत्मनिर्भर होना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार का दायित्व है कि वह अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करे और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराए।
नुक्कड़ नाटक और गीतों से किया जागरूक
कार्यक्रम में कला मंच रजोल के कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक और प्रेरणादायक गीतों के माध्यम से 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का संदेश लोगों तक पहुंचाया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए यह बताया गया कि बेटियां आज शिक्षा, विज्ञान, खेल, प्रशासन और रक्षा सहित हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं।
कार्यक्रम की प्रमुख बातें
- पलेरा और नंदरुल पंचायतों में जागरूकता अभियान आयोजित।
- बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर।
- नुक्कड़ नाटक और गीतों के माध्यम से सामाजिक संदेश।
- ग्रामीणों से बेटियों को समान अवसर देने की अपील।
निष्कर्ष
'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव का प्रयास है। कांगड़ा में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम ने बेटियों की शिक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के महत्व को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया।
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