टांडा मेडिकल कॉलेज में TB जांच की नई LPA सुविधा शुरू
डॉ. आरपीजीएमसी टांडा में टीबी की तेज जांच के लिए First-Line LPA सुविधा शुरू, NTEP के तहत प्रमाणित आधुनिक डायग्नोस्टिक सेवा।
सुमन महाशा। कांगड़ा
डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज (RPGMC) टांडा के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने टीबी जांच के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान को फर्स्ट-लाइन लाइन प्रोब एसे (LPA) सेवा शुरू करने के लिए आधिकारिक प्रमाणन प्राप्त हो गया है।
यह अत्याधुनिक सुविधा माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस की त्वरित पहचान और प्रथम श्रेणी की एंटी-टीबी दवाओं के प्रति प्रतिरोध (Drug Resistance) का पता लगाने में सक्षम होगी।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित सुविधा
यह सेवा राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के अंतर्गत, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सेंट्रल टीबी डिवीजन द्वारा संचालित नेशनल मायकोबैक्टीरियोलॉजी सर्टिफिकेशन सिस्टम से प्रमाणित है।
इससे क्षेत्र में—
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टीबी की जल्दी और सटीक पहचान संभव होगी
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मरीजों को समय पर उपचार मिलेगा
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ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी के मामलों की बेहतर निगरानी होगी
किसके मार्गदर्शन में मिली सफलता?
इस उपलब्धि में संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा—
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प्रिंसिपल डॉ. मिलाप शर्मा
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अतिरिक्त निदेशक डॉ. अवनींदर सिंह
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विभागाध्यक्ष (माइक्रोबायोलॉजी) डॉ. अनुराधा सूद
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जिला टीबी अधिकारी डॉ. राजेश सूद
तकनीकी क्रियान्वयन और दैनिक संचालन की जिम्मेदारी माइक्रोबायोलॉजिस्ट श्री विजय ने निभाई, जबकि नोडल अधिकारी डॉ. रवि बराड़ का विशेष सहयोग रहा।
टीम के अन्य सदस्यों—धर्मेंद्र, सुमित, रविंदर, मंंजना, निशांत और रशम—ने भी स्थापना और संचालन में अहम भूमिका निभाई।
भविष्य की योजना: सेकंड-लाइन LPA
माइक्रोबायोलॉजी विभाग भविष्य में सेकंड-लाइन LPA के लिए भी प्रमाणन प्राप्त करने की योजना बना रहा है। इससे दवा-प्रतिरोधी (Drug-Resistant) टीबी की जांच और भी मजबूत होगी।
निष्कर्ष
टांडा मेडिकल कॉलेज की यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश में टीबी नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नई LPA सुविधा से मरीजों को समय पर सटीक जांच और बेहतर उपचार मिलेगा, जिससे “टीबी मुक्त भारत” के लक्ष्य को मजबूत आधार मिलेगा।
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