हाईकोर्ट का बड़ा झटका! सुक्खू सरकार का भर्ती कानून रद्द — कर्मचारियों के हक पर राजनीति बेनकाब?
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भर्ती एवं सेवा शर्तें कानून को निरस्त कर दिया। भाजपा नेता बिक्रम ठाकुर ने इसे सुक्खू सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों पर करारा तमाचा बताया। कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर विवाद गहराया।
धर्मशाला।
बिक्रम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा भर्ती एवं सेवा शर्तें कानून को निरस्त किए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का यह फैसला प्रदेश सरकार की “कर्मचारी विरोधी” और “असंवैधानिक” नीतियों पर करारा तमाचा है। उनके अनुसार, सरकार ने इस कानून के जरिए कर्मचारियों की सेवा शर्तों में मनमाने बदलाव करने और उनके अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की थी।
बिक्रम ठाकुर ने आरोप लगाया कि विशेष रूप से कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा था। कानून में ऐसा प्रावधान था कि केवल नियमित कर्मचारियों को ही पूर्ण सेवा लाभ मिलेंगे, जबकि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को इन अधिकारों से वंचित रखा जाएगा। यहां तक कि पहले दिए गए लाभ भी वापस लेने की बात कही गई थी, जिसे उन्होंने पूरी तरह अन्यायपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि इस भेदभाव के खिलाफ हजारों कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। हाईकोर्ट के फैसले ने यह साफ कर दिया कि सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों को न्याय देना नहीं, बल्कि उनके अधिकारों को सीमित करना था।
पूर्व मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पिछले दो वर्षों से कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों को लागू करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारी हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत है।
बिक्रम ठाकुर ने यह भी कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब सरकार को न्यायालय में झटका लगा हो। इससे पहले भी कई फैसले अदालत द्वारा खारिज किए जा चुके हैं, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये कानूनी लड़ाइयों पर खर्च किए जा रहे हैं, जो जनता के पैसे का दुरुपयोग है।
अंत में उन्होंने सरकार से मांग की कि कर्मचारियों के सभी लंबित अधिकार और लाभ तुरंत जारी किए जाएं और भविष्य में इस तरह के “तुगलकी” फैसलों से बचा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
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