मनरेगा के नए बदलाव गरीब-मजदूर विरोधी: देवेन्द्र जग्गी
मनरेगा में किए गए नए बदलाव गरीब, मजदूर और किसान विरोधी हैं। पूर्व महापौर देवेन्द्र जग्गी ने ग्राम सभा के अधिकार छीने जाने पर सवाल उठाए।
सुमन महाशा। कांगड़ा
पूर्व महापौर धर्मशाला देवेन्द्र जग्गी ने मनरेगा योजना में किए गए हालिया बदलावों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इन्हें गरीब, मजदूर और किसान विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा कि इन परिवर्तनों से ग्रामीण विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
पहले ग्राम सभा के पास थे वास्तविक अधिकार
देवेन्द्र जग्गी ने कहा कि मनरेगा के प्रारंभिक स्वरूप में—
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ग्राम सभा स्वयं विकास कार्यों का प्रस्ताव पारित करती थी
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डंगा निर्माण, खेतों की सुरक्षा, कच्चे रास्ते
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पानी की निकासी, नालियों की मरम्मत
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जल स्रोतों का संरक्षण
जैसे छोटे लेकिन जरूरी कार्य तुरंत शुरू हो जाते थे। इससे मजदूरों को समय पर रोजगार मिलता था और गांवों से पलायन पर भी रोक लगती थी।
नए बदलावों से ग्राम सभा हुई कमजोर
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए नए बदलावों के बाद—
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ग्राम सभाओं की शक्तियां सीमित कर दी गईं
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फैसले गांव से हटाकर ऊपरी स्तर पर केंद्रित कर दिए गए
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स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम तय करने का अधिकार छिन गया
यह स्थिति पंचायती राज व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ है।
ग्रामीण लोकतंत्र पर सीधा हमला
देवेन्द्र जग्गी ने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि—
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
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बुनियादी ढांचे का विकास
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लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा
देने वाली योजना रही है। ग्राम सभा को कमजोर करने का मतलब है ग्रामीण लोकतंत्र की आवाज दबाना।
राज्यों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
उन्होंने यह भी कहा कि—
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राज्यांश को 40% करना
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पहले से आर्थिक संकट झेल रहे राज्यों पर बोझ
का कारण बन रहा है। इसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास कार्यों पर साफ दिखाई दे रहा है।
केंद्र सरकार से पुनर्विचार की मांग
देवेन्द्र जग्गी ने केंद्र सरकार से मांग की कि—
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मनरेगा में किए गए बदलावों पर पुनर्विचार किया जाए
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ग्राम सभा को उसके अधिकार लौटाए जाएं
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योजना को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप मजबूत किया जाए
ताकि ग्रामीण विकास, रोजगार और सम्मान सुरक्षित रह सके।
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