अंतरजातीय विवाह कानून पर उठे सवाल! वाल्मीकि महासभा ने सरकार से मांगा बड़ा बदलाव
अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा ने अंतरजातीय विवाह से जुड़े मौजूदा कानूनों में संशोधन की मांग उठाई है। महासभा का कहना है कि विवाह के बाद महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक स्थिति को लेकर कई विसंगतियां मौजूद हैं।
कांगड़ा। सुमन महाशा
Akhil Bharatiya Valmiki Mahasabha के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष Sudesh Sahotra ने अंतरजातीय विवाह से जुड़े मौजूदा कानूनों और प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए इनमें संशोधन की मांग की है।
सुदेश सहोंतरा ने कहा कि वर्तमान में अनुसूचित जाति के युवक या युवती द्वारा ब्राह्मण, राजपूत, खत्री अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय में विवाह करने पर सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है, लेकिन इससे संबंधित सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जब अनुसूचित जाति की किसी युवती का विवाह सवर्ण या ओबीसी समुदाय के युवक से होता है, तो विवाह के बाद उसकी जातिगत स्थिति और उससे जुड़े अधिकारों को लेकर कई व्यावहारिक प्रश्न सामने आते हैं। इसी प्रकार अन्य समुदाय की युवती द्वारा अनुसूचित जाति के युवक से विवाह करने की स्थिति में भी विभिन्न कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर स्पष्टता आवश्यक है।
महासभा के अनुसार, केवल आर्थिक प्रोत्साहन देने के बजाय विवाह के बाद महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक स्थिति से जुड़े मुद्दों पर व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए। सहोंतरा ने कहा कि सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कानूनी सुधारों की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा इस संबंध में हिमाचल प्रदेश सरकार तथा भारत सरकार को ज्ञापन सौंपेगी और अंतरजातीय विवाह से जुड़े प्रावधानों में संशोधन की मांग करेगी।
सहोंतरा ने कहा कि महासभा का उद्देश्य सामाजिक न्याय, समान अधिकार और महिलाओं के हितों से जुड़े मुद्दों को सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाना है, ताकि इस विषय पर व्यापक चर्चा और उचित समाधान निकल सके।
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