नादौन के गुरुद्वारा दसवीं पातशाही में धूमधाम से मनाया फतेह दिवस
नादौन के ऐतिहासिक गुरुद्वारा दसवीं पातशाही में फतेह दिवस श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया। नगर कीर्तन, गुरबाणी और अटूट लंगर का आयोजन।
नादौन । नादौन के ऐतिहासिक गुरुद्वारा दसवीं पातशाही में रविवार को फतेह दिवस हर्षोल्लाह से मनाया गया। इस पावन स्थान पर पहुंचे भारी संख्या में संतों ने कोई बोले राम राम कोई खुदा सहित गुरुवाणी को श्रवण करके सारा दिन चलने वाले गुरु के अटूट लंगर में प्रसाद ग्रहण किया। सुबह इकट्ठे हुए लोगों तथा बाहरी राज्यों से आई संगतों ने शहर भर में प्रभात फेरी निकाली। वातावरण को वाहेगुरुमय बना दिया। सुबह 10 बजे श्री गुरु जी का भोग डाला गया।
इस अवसर पर सबसे पहले शुक्रवार से चल रहे श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पाठ का भोग डाला गया। गुरुद्वारे के हेड ग्रंथी सिमरजीत सिंह ने मानवता की सुख शांति के लिए अरदास पढ़ी। नगर कीर्तन में आगे-आगे चल रहे सिंह साहिबान श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी के लिए सड़क को पानी से धोते हुए चल रहे थे तो कुछ साहिबान युगों ने युद्ध कला गतका का भी प्रदर्शन किया जो कि अपने एक खास पहचान छोड़ गया इस कला में सिख युवकों ने तलवारों तथा अन्य युद्ध औजारों से अपने जौहर दिखाएं जबकि सिख सेना को युद्ध के लिए प्रेरित करने वाले बैंड के कलाकारों ने लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।
इस कार्यक्रम में सिंह सभा नादौन के सरदार बसंत सिंह, सरदार हरदीप सिंह ल, सरदार मंजीत सिंह महिला गुरबाणी मंडल नादौन सहित शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी हिमाचल के सदस्य सरदार दलजीत सिंह भिंडर, भाई मोहन सिंह संत समाज की ओर से बाबा वतन सिंह सहित शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी के अन्य पदाधिकारी तथा सैकड़ो श्रद्धालुओं ने माथा टेका।
ग्रंथी ज्ञानी सिमरजीत सिंह ने इस पावन स्थल की ऐतिहासिक तथा धार्मिक महत्वता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1747 में क्षेत्र के पहाड़ी राजाओं के आवाहन पर गुरु गोबिंद सिंह जी ने आक्रमणकारी मुगल फौज के छक्के छुड़ा दिए थे और उन्हें भगाने के लिए मजबूर कर दिया था उन्होंने कहा कि इस स्थल पर वाहेगुरु जी ने अपने सिंह सैनिकों के साथ 9 दिनों तक विश्राम किया था तथा विचित्र नाटक ग्रंथ के कुछ पन्ने लिखे थे।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0