आरडीजी खत्म होना सरकार नहीं, जनता के अधिकारों पर चोट: सुक्खू

हिमाचल में आरडीजी खत्म होने पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने जताई चिंता। बोले– यह सरकार नहीं, जनता के अधिकारों का मुद्दा है, बजट पर पड़ेगा बड़ा असर।

Feb 8, 2026 - 17:12
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आरडीजी खत्म होना सरकार नहीं, जनता के अधिकारों पर चोट: सुक्खू

शिमला । राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य की जनता के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह किसी सरकार का नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के नागरिकों के संवैधानिक हक का सवाल है।

आज शिमला में वित्त विभाग द्वारा राज्य की वित्तीय स्थिति और आरडीजी समाप्ति के प्रभावों पर दी गई प्रस्तुति के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों का प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आगामी बजट पर दूरगामी असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि आरडीजी का प्रावधान समाप्त किया गया तो राज्य की वित्तीय स्थिरता बनाए रखना बेहद कठिन हो जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि भाजपा विधायकों को भी इस प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि भाजपा को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर प्रदेश के हित में स्थिति को समझना चाहिए था।

सुक्खू ने कहा कि देश के 17 राज्यों में आरडीजी समाप्त कर दी गई है, लेकिन हिमाचल पर इसका सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा क्योंकि राज्य के कुल बजट का 12.7 प्रतिशत हिस्सा आरडीजी से प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्य की कर संग्रह दर घटकर लगभग 8 प्रतिशत रह गई है, जबकि पहले यह 13 से 14 प्रतिशत थी। चूंकि हिमाचल एक उत्पादक राज्य है और जीएसटी उपभोग आधारित कर प्रणाली है, इसलिए इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की कि जिन जल विद्युत परियोजनाओं ने अपना ऋण चुका दिया है, उन पर राज्य को कम से कम 50 प्रतिशत रॉयल्टी सुनिश्चित की जाए। साथ ही, जिन परियोजनाओं के संचालन के 40 वर्ष पूरे हो चुके हैं, उन्हें राज्य को वापस लौटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड से राज्य को वर्ष 2012 से अब तक 4500 करोड़ रुपये की बकाया राशि नहीं मिली है, जबकि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला भी आ चुका है।

उन्होंने बताया कि शानन पावर प्रोजेक्ट की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है और इसे वापस लेने के लिए राज्य सरकार कानूनी लड़ाई लड़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है और बिना आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डाले संसाधन जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत आरडीजी का प्रावधान किया गया है, जो 15वें वित्त आयोग तक राज्य को मिलता रहा। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास कार्यों और राज्य योजनाओं को पूरा करने के लिए लगभग 6,000 करोड़ रुपये का संसाधन अंतर सामने आ रहा है, जिसे भरने में आरडीजी अहम भूमिका निभाती रही है।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि वित्त विभाग द्वारा केवल सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं और इस पर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल वर्तमान सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आने वाली सरकारों और प्रदेश की जनता पर पड़ेगा।

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