डॉ. विक्रांत आर्य को CT University से पीएचडी
सरकारी फार्मेसी कॉलेज रक्कर के सहायक प्रोफेसर डॉ. विक्रांत आर्य ने CT University लुधियाना से पीएचडी पूरी की, शोध के लिए कई पुरस्कार हासिल किए।
सुमन महाशा। कांगड़ा
हिमाचल प्रदेश के शैक्षणिक क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है कि सरकारी फार्मेसी कॉलेज रक्कर के सहायक प्रोफेसर डॉ. विक्रांत आर्य ने CT University, लुधियाना (पंजाब) से अपनी पीएचडी सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली है।
उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि प्रदेश के उच्च शिक्षा जगत के लिए भी प्रेरणादायक है।
प्रकृति के लिथोफाइटिक जीवन रूपों पर रहा शोध
डॉ. आर्य का शोध कार्य प्रकृति के लिथोफाइटिक जीवन रूपों पर केंद्रित रहा, जो पारिस्थितिकी और जैव विविधता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जाता है।
लिथोफाइटिक पौधे वे होते हैं जो चट्टानों पर उगते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहते हैं। इस विषय पर किया गया उनका शोध पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के अध्ययन में उपयोगी साबित हो सकता है।
शोध के दौरान कई सम्मान
अपने डॉक्टरेट अध्ययन के दौरान डॉ. विक्रांत आर्य को विभिन्न संस्थानों में उत्कृष्ट शोध प्रस्तुतियों के लिए सम्मानित किया गया।
उन्हें प्राप्त प्रमुख सम्मान:
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Lovely Professional University, जालंधर में सर्वश्रेष्ठ पेपर प्रस्तुति पुरस्कार
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CT University में दो सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुति पुरस्कार
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Indo-Soviet Friendship College of Pharmacy, मोगा (पंजाब) में तृतीय पुरस्कार
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मिनर्वा कॉलेज ऑफ फार्मेसी, इंदौरा (हिमाचल) में ‘सर्वश्रेष्ठ पीएचडी स्कॉलर’ सम्मान
इन पुरस्कारों ने उनके शोध कौशल और अकादमिक प्रतिबद्धता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
माता को दिया सफलता का श्रेय
डॉ. विक्रांत आर्य ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपनी माता श्रीमती चंदर कला को दिया। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा उन्हें परिवार से ही मिली।
उनकी यह यात्रा समर्पण, परिश्रम और लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास का प्रेरक उदाहरण है।
निष्कर्ष
डॉ. विक्रांत आर्य की यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश के शिक्षा जगत के लिए गौरव का विषय है। यह सफलता प्रदेश के युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
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