हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, वेतन समानता पर झटका
हिमाचल हाईकोर्ट ने वेतन समानता मामले में बड़ा फैसला सुनाया। सहकारिता निरीक्षकों को पंजाब जैसा वेतन देने का आदेश रद्द, राज्यों में समान वेतन अनिवार्य नहीं।
रोजाना हिमाचल ब्यूरो। शिमला
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सरकारी कर्मचारियों के बीच वेतन समानता के दावों पर असर डालने वाले अहम फैसले में राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण (एसएटी) के 2018 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें हिमाचल सरकार को सहकारिता विभाग के निरीक्षकों को पंजाब की तर्ज पर संशोधित वेतनमान देने का निर्देश दिया गया था। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह सांघीवालिया और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर रिट याचिकाओं के एक समूह को स्वीकार करते हुए न्यायाधिकरण के 13 अप्रैल 2018 के साझा आदेश को दरकिनार कर दिया है। यह विवाद सहकारिता विभाग में कार्यरत निरीक्षकों के दावों से पैदा हुआ था।
अदालत ने टिप्पणी की, 'हिमाचल प्रदेश राज्य को केवल इसलिए वेतन संशोधन लागू करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, क्योंकि किसी अन्य राज्य ने ऐसा किया है।' अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के निर्देश वैधानिक प्राधिकरण के तहत बनाये गये सेवा नियमों और वेतन ढांचे को फिर से लिखने जैसा होगा। खंडपीठ ने आगे बताया कि न्यायाधिकरण ने मुख्य रूप से पदनाम की समानता पर भरोसा किया था, जबकि कैडर संरचना, योग्यता, कर्तव्यों और शासी सेवा नियमों जैसे महत्वपूर्ण कारकों की अनदेखी की थी। अदालत ने माना कि इस कारण न्यायाधिकरण के निष्कर्ष कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं रह गए।
राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण का आदेश रद्द करते हुए उच्च न्यायालय ने इस सिद्धांत की पुष्टि की है कि राज्यों के बीच वेतन समानता के दावों को अधिकार रूप में लागू नहीं किया जा सकता है। इस फैसले का उन समान सेवा संबंधी विवादों पर भी व्यापक असर पड़ेगा, जहां कर्मचारी अन्य राज्यों में प्रचलित वेतन ढांचे के आधार पर लाभ मांगते हैं। तदनुसार, राज्य द्वारा दायर याचिकाओं को स्वीकार कर लिया गया और कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान प्रदान करने वाले न्यायाधिकरण द्वारा जारी सभी निर्देशों को दरकिनार कर दिया गया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0