टांडा मेडिकल कॉलेज में पहली रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट

टांडा मेडिकल कॉलेज में पहली बार रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सफल। आधुनिक तकनीक से मरीज को बेहतर इलाज और तेजी से रिकवरी संभव।

Apr 23, 2026 - 12:08
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टांडा मेडिकल कॉलेज में पहली रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट

सुमन महाशा। कांगड़ा
हिमाचल प्रदेश के डॉ. राजेंद्र प्रसाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (RPGMC) टांडा ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां पहली बार सफलतापूर्वक रोबोटिक रीनल (किडनी) ट्रांसप्लांट किया गया, जो प्रदेश में उन्नत चिकित्सा की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।


विशेषज्ञ टीम ने किया जटिल ऑपरेशन

इस जटिल सर्जरी को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अंजाम दिया, जिसमें सर्जरी, नेफ्रोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग की अहम भूमिका रही।

  • सर्जिकल टीम में अनुभवी चिकित्सक शामिल रहे
  • नेफ्रोलॉजी टीम ने मरीज की स्थिति का समुचित प्रबंधन किया
  • एनेस्थीसिया टीम ने ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित की

परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल

यह ट्रांसप्लांट एक लाइव-रिलेटेड एबीओ-कम्पैटिबल प्रक्रिया थी, जिसमें पत्नी ने अपने पति को किडनी दान की।
👉 यह उदाहरण दर्शाता है कि:

  • अंगदान से जीवन बचाया जा सकता है
  • परिवार का सहयोग मरीज के लिए सबसे बड़ा सहारा होता है

रोबोटिक तकनीक से क्या होगा फायदा?

इस आधुनिक तकनीक के उपयोग से कई लाभ मिलते हैं:

  • सर्जरी में अधिक सटीकता
  • कम दर्द और कम रक्तस्राव
  • तेजी से रिकवरी
  • बेहतर उपचार परिणाम

टांडा में 23वां किडनी ट्रांसप्लांट

यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि:

  • यह RPGMC टांडा का 23वां किडनी ट्रांसप्लांट है
  • पहली बार रोबोटिक तकनीक का उपयोग किया गया है
  • इससे संस्थान की विशेषज्ञता और मजबूत हुई है

सरकार और टीम का सहयोग रहा अहम

इस उपलब्धि के पीछे प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग का निरंतर सहयोग रहा है।
साथ ही ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर और ऑपरेशन थिएटर स्टाफ की मेहनत भी सराहनीय रही।


निष्कर्ष

टांडा मेडिकल कॉलेज की यह सफलता हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली है। इससे भविष्य में मरीजों को राज्य के भीतर ही विश्वस्तरीय इलाज मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

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